अन्नदाता को बचाइए - अभिजीत राणे


रिपोर्ट : अनीता शुक्ला


मुंबई : किसान हमारा अन्नदाता है। किसान हैं तो हम हैं। पर अफसोस की बात है इस राज्य में किसान ही सबसे दुखी समुदाय है। यहां पर किसानों के आत्महत्या करने का सिलसिला नहीं थम रहा है। इस साल जनवरी से लेकर जून तक 1074 किसानों ने आत्महत्या  की है। अर्थात हर रोज 6 किसानों ने अपनी जान ली। 


गत छह महीने के अंदर 1,074 किसानों की  आत्महत्याएं कोई मामूली बात नहीं है। यह हमारे समाज के मुंह पर एक तमाचा है कि हम अपने अन्नदाता की ही रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। जनवरी से जून के बीच हुई किसानों की आत्महत्याओं के आंकड़े डराने वाले हैं। आंकड़ों के हिसाब से हर रोज छह किसानों ने आत्महत्या की। सबसे ज्यादा किसानों के आत्महत्या करने के मामले जून महीने में सामने आए, इस दौरान 214 केस दर्ज किए गए।


कोरोना काल मे लॉकडाउन के दौरान किसान बहुत प्रभावित हुए। सबसे ज्यादा सब्जी और फलों के किसान परेशान हुए। लॉकडाउन में ट्रांसपॉर्ट रुकने से किसानों की सब्जियां और फल बड़ी थोक मार्केट में नहीं जा सके। कई किसानों के उत्पाद खराब हो गए।


जून तक हुई 1074 किसानों की आत्महत्याओं में सबसे ज्यादा जून में हुईं। इस दौरान लॉकडाउन के चलते सामानों की सप्लाई चेन टूट गई थी। थोक बाजार में उत्पादों के दाम गिर गए। औऱ किसानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।


मेरी महा विकास आघाडी सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे जी से निवेदन है कि इस मुद्दे पर ध्यान देकर किसानों को बचाइए।


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