आवाज द्वारा कोरोना जांच को प्रशासनिक हरी झंड़ी दी जाए। मनपा आयुक्त से महापौर का निवेदन


रिपोर्ट : प्रमोद कुमार


ठाणे :  आवाज द्वारा किसी भी व्यक्ति को जो कोरोनाग्रस्त हैं, उनकी पहचान हो सकती है। इसको लेकर कई देशों में रिसर्च किए गए हैं। कुछ देशों में तो आवाज द्वारा कोरोना रोगियों की पहचान कर उसका इलाज किया जा रहा है। इन बातों का जिक्र करते हुए ठाणे महापौर नरेश ह्मस्के ने मनपा आयुक्त डॉ. विपीन शर्मा को निवेदन दिया है। जिसके माध्यम से मांग की गई है कि ठाणे शहर में भी इस जांच को प्रशासनिक हरी झंड़ी दी जाए। आज कोरोना के सफाए के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही युद्धस्तर उपाय योजनाओं पर भी अमल किया जा रहा है। जबकि कोरोना उपचार की खोज भी जारी है। चिकित्सा शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि आवाज की जांच कर कोरोना रोगियों की पहचान  के बाद उपचार किया जा सकता है। इन बातों का जिक्र करते हुए ह्मस्के ने बताया है कि  कोरोना को लेकर आवाज और श्वसन निदान पद्धति सामने आई है। आगे कहा गया है कि घर बैठे व्यक्ति अपनी आवाज और सांस अपने मोबाईल में डालकर किसी अस्पताल या लेब में ना जाकर सीधे ई-मेल द्वारा क्लिनिक में भेजें तो केवल २० से २५ मिनट में रिपोर्ट आ जाएगी।


आवाज का पारामीटर बदला है। यदि बदला है तो उसकी पहचान कर ली जाती है। कई देशों में इसे आजमाया जा रहा है। ठाणे शहर स्थित अस्पतालों में भी इसको लेकर शोध किया जा रहा है। ऐसे अस्पतालों में ठाणे के भूमकर इनटी हॉस्पीटल  (डॉ. आशिष भूमकर), वॉईस किल्नीक, ठाणे (वॉईस थेरपिस्ट व स्पीच लॅग्वेज पॅथॉलॉलिस्ट सोनाली लोहार) व हेल्थ को हिअरिंग स्पीच एण्ड फिलीओक्लोनिक (न्यूरोस्पीच लॅग्वेज थेरपिस्ट डॅनिअल जोनास्) शामिल हैं। यहां आवाज और श्वसन द्वारा कोरोना की पहचान के लिए शोध किया जा रहा है। इन बातों का जिक्र करते हुए महापौर ह्मस्के ने  कहा कि ऐसे अस्पताल मुंबई में भी प्रस्तावित हैं। इसके द्वारा हजारों रोगियों की पहचन कम समय में की जा सकती है।


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