2020 का आजाद भारत लिखेगा नया इतिहास


- ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री


15 अगस्त 1947 में जन्मा आज़ाद भारत इस वर्ष 73 वर्ष का हो गया है और 74वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जो ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री के अनुसार भारत के लिए थोड़ा कठिन वर्ष है. ग्रहों की स्थिति देखते हुए ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री कहते हैं, ''वर्तमान में चन्द्रमा की महादशा में शनि की अंतर दशा चल रही है. जो 9 जुलाई 2021 तक रहेगी. इस स्थिति में भारत हमेशा अपने पड़ोसी मुल्कों से मानसिक रूप से पीड़ित रहेगा लेकिन बुध की अन्तरदशा आने के बाद भारत करारा जवाब देगा. साथ ही विश्व गुरु बनने में समर्थ साबित होगा. वैश्विक दृष्टि से भी भारत काफी प्रगति करेगा. सिर्फ यही नहीं इस दशा में भारत अपनी कई गुप्त शक्तियों के बारे में भी शोध करने में सफल होगा. ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री बता रहे हैं कि 15 अगस्त को भारत की आजादी के 73 वर्ष पूर्ण होंगे लेकिन वर्ष कुंडली के नियम अनुसार गोचर में सूर्य भारत की आजादी की कुंडली के सूर्य के समान राशि-अंश-कला पर 14 अगस्त को शाम 4 बजकर 58 मिनट पर पहुंचेंगे। इस समय की वर्ष कुंडली में धनु लग्न उदय हो रहा है जो कि आजाद भारत की वृषभ लग्न की कुंडली का अष्टम भाव है। जो किसी युद्ध और बड़े नेताओं के साथ अनहोनी घटना होने का संकेत दे रहा है। धनु लग्न की वर्ष कुंडली में धनेश के सप्तम भाव में राहु और छठे घर के स्वामी शुक्र से युत होकर एक भयानक योग बना रही है। पड़ोसी पर भारी पड़ रही युद्ध के कारक ग्रह मंगल की दृष्टि अशुभ है।


माकेश बुध विनाश स्थान यानी अष्टम भाव में होकर पाप ग्रह शनि से दृष्ट है। इन सब योगों के साथ आजद भारत की कुंडली में चल रही गुरु में शनि की योगिनी दशा देश के लिए युद्ध के योग निर्मित कर रही है । 15 अगस्त के कुछ दिनों के बाद चीन-भारत की सीमाओं पर पाकिस्तान की मिलीभगत से सैन्य ताकत दिखा सकता है।


गौरतलब है कि १९४७ में जन्मे भारत की कुंडली में सूर्य, बुध,शनि, शुक्र और चंद्रमा जैसे पाँच ग्रह पराक्रम की स्थिति में है. भारत का पराक्रम इतना शक्तिशाली है की उसे संसार की कोई शक्ति झुका नही सकती। हाँ यह बात अवश्य है की भारत की अपने शत्रुओं से ज़ोर आज़माइश चलती रही है और चलती रहेगी लेकिन भारत हमेशा उनके दांत खट्टे करने में कामयाब होता रहा है और होता रहेगा। वैसे भी भारत का लग्न वृषभ है और इस लग्न में जातक का शत्रु से सम्बंध रहता ही है, जैसे भगवान कृष्ण का था। जिस तरह भगवान कृष्ण के शत्रु उसके सगे सम्बंधी थे, वैसे ही भारत का मुख्य शत्रु पाकिस्तान है जो कभी भारत का हिस्सा था।


1947 में जब भारत आजाद हुआ उस समय भारत की कुंडली में शनि की महादशा चल रही थी। भारत की कुंडली में शनि भाग्य और कार्यक्षेत्र का स्वामी है। भारत की कुंडली में गुरु अकारक है, जो उत्तर दिशा का स्वामी है और भारत को उत्तर दिशा से ही कष्ट है। क्योंकि चीन भारत के उत्तर में है इसलिये 1962 में शनि की महादशा में राहु की अंतर दशा जब चल रही थी तब चीन ने भारत को धोखा दिया था। भारत की कुंडली में पश्चिम देशों से लाभ का योग है और मजेदार बात यह है कि पाकिस्तान भारत से पश्चिम में है। वर्ष कुंडली में धन स्थान पर बैठे वक्री शनि पर सूर्य और बुध की दृष्टि अर्थव्यस्था में मंदी जारी रहने तथा सरकार के द्वारा बाजार में हस्तक्षेप का संकेत है। सूर्य और बुध पर शनि की दृष्टि वित्तीय बाजार में गिरावट तथा सोने में तेजी जारी रहने का संकेत हैं। अगले एक वर्ष के भीतर विवाह, संपति, उत्तराधिकार, दत्तकपुत्र आदि पर्सनल लॉ में बड़े बदलाव लाकर सरकार जनता के कुछ समूहों के बड़े विरोध का सामना कर सकती है।


वर्ष कुंडली के सप्तम भाव में राहु, शुक्र और मुंथा का होना विवाह संबंधी बड़े कानूनों में बदलाव का संकेत हैं, जो कि सरकार के कॉमन सिविल कोड की ओर कदम बढ़ने का इशारा है, जिसके लिए उनको समाज के एक बड़े वर्ग का प्रतिरोध झेलना पड़ सकता है, तथा किसी बड़े नेता को हताहत होने का भी संकेत प्रदान करता है। भारत की आजादी की कुंडली में चल रही चंद्र-शनि की कठिन दशा अगले वर्ष जून तक इन बड़े सामाजिक बदलावों से देश में उथल-पुथल मचा सकती है । वर्तमान सरकार को विरोध का सामना करना पड़ेगा। चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा। कोरोना जेसी महामारी का भी इलाज भारत खोज निकालेगा। आयुर्वेद का पुनः बड़े स्तर पर प्रचार और प्रसार विश्व में होगा। कहीं-कहीं आंदोलन, संघर्ष, दुर्घटना या भूकम्प जैसी स्थिति आ सकती है। नई-नई टेक्नोलॉजी में भारत आगे बढ़ेगा।


वर्ष कुंडली का अध्ययन करने पर संकेत मिलते हैं कि भारत के लिए वर्ष 2020 बाहरी देशों से संबंधों के अपेक्षा भले ही अच्छा सिद्ध हो लेकिन आंतरिक मोर्चे पर भारत में अराजकता, अंतर्विरोध बढ़ने की स्थितियां बनेंगी। सत्ताधीशों और जनता के बीच भयंकर मतभेद उभरेंगे। प्रजा में अराजकता फैलेगी, सरकार के निर्णयों का भारी मात्रा में विरोध होगा। सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, रैलियां होंगी, लेकिन अंतत: कोई ऐसी बड़ी घटना घटित होगी जो समस्त देशवासियों को तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद एकसूत्र में बांधने का काम करेगा। इसी वर्ष 2020 में काफी वर्षों से लंबित राम जन्मभूमि का भी फैसला हुआ। कश्मीर को अपना पूर्ण दर्जा प्राप्त हुआ और बहुत सारी चीजों का भारत में विस्तार हुआ। राफैल जैसे लड़ाकू विमान भारत को प्राप्त हुए और हम विश्व में अलग अपनी पहचान बना रहे हैं। विश्वगुरु का बहुत ही जल्द दर्जा प्राप्त हो जाएगा।


शनि को राज्यपक्ष का कारक ग्रह भी माना जाता है। शनि के राशि परिवर्तन से देश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलेंगे। सत्तापक्ष के साथ कई नए दल आ सकते हैं, वहीं कुछ दल सत्तापक्ष की पार्टी से अलग भी हो सकते हैं। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते सत्ताधीशों को अपनों से ही विरोध का सामना करना पड़ेगा। विपक्षी दलों का मजबूत गठबंधन सरकार के निर्णयों के खिलाफ आवाज बुलंद करेगा । सितंबर से दिसंबर के बीच भारत में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ सकती है । भीषण बाढ़, भूकंप, सुनामी जैसी हालत दक्षिणी राज्यों में हो सकती है। भीषण बर्फबारी, हिमस्खलन, भूस्खलन जैसी स्थिति बनेगी ।भारत की जन्म कुंडली के दुसरे स्थान पर मंगल मारकेश का होकर बैठा है तथा कुण्डली में अनंत कालसर्प योग बना हुआ है जो स्वत: भंग होकर काल अमृत योग में परिवर्तित हो चुका है। परन्तु यह ग्रह स्थिती अपने ही लोंगों से गृहयुद्ध करवाएगी जो देशहित में कदापि नहीं है। देश को खतरा पड़ोसी मुल्कों के साथ साथ उन आस्तीन के साँपों से भी है जो भारत में रहकर पडोसी मुल्क का गुणगान कर रहे हैं और आतंकवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद और साम्यवाद जैसे संगीन अपराधों को जन्म दे रहे हैं। हालांकि ख़ुशी की बात यह है कि ग्रहों के राजा भगवान सूर्य और शनि ने अकेले ही राजयोग बनाया है, अत: हर क्षेत्र में भारत की विजय सुनिश्चित है।


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