Unnao : जनपद के किसान भी ड्रैगन फ्रूट्स जैसी खेती से अधिक से अधिक जुड़े


रिपोर्ट : तनवीर खान 


उन्नाव, (उ0प्र0) : ड्रैगन फ्रूट्स मुख्य रूप से थाईलैंड, वियतनाम, इजरायल और श्रीलंका में लोकप्रिय है। जिला अधिकारी रवीन्द्र कुमार ने इस तरह के फल फ्रूट से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनपद उन्नाव में ऐसे किसान है जो थाईलैंड, वियतनाम, इजरायल और श्रीलंका की पैदावार अपने जनपद में कर रहें हैं। इस तरह की फसल को बढ़ावा देना बहुत अच्छी बात है। जनपद के किसानों को भी ऐसे उत्पादों से जुड़ कर प्रदेश में किसानों का नाम तो होगा ही साथ ही जनपद का नाम रोशन करेंगे।


उन्होंने ने बताया कि बाजार में 150-200 रूपए किलो तक दाम मिलने की वजह से हाल के दिनों में भारत ने भी इसकी खेती का प्रचलन बढ़ा है। कम वर्षा वाले क्षेत्र ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। ड्रैगन फ्रूट में औषधि गुण भी होते हैं इस फल में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जो कई सारे रोगों से लड़ने में सहायता करता है। इस फल के सेवन से मधुमेह नियंत्रित होती है। शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल को कम करता है।ड्रैगन फ्रूट के पौधे का उपयोग सजावटी पौधे के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। यह फ्रूट खाने में मुलायम होता है और हमें हमारे दैनिक जीवन में इस फ्रूट का उपयोग करना चाहिए। ड्रैगन फ्रूट को ताजे फल के तौर पर खा सकते हैं। साथ ही इस फल से जैम, आइसक्रीम, जैली, जूस और वाइन भी बना सकते हैं। सौंदर्य प्रसाधन के तौर पर भी इसे फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।


जिला अधिकारी को फसल उत्पादक ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के उपज एक सीजन में तीन से चार बार फल देता है। प्रतिफल का वजन लगभग 300 से 800 ग्राम तक होता है। एक पोल पर फलों का कम से कम वजन 20 किलो मान लेते हैं ,तो वजन 6000 किलो फल प्रति एकड़ प्राप्त होता है। बाजार में 200 250 रुपए तक दाम मिलने की से लागत काटकर 6-8 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। कीट एवं बीमारी ड्रैगन फ्रूट के खेती की खासियत यह है कि इसके पौधों में अब तक किसी तरह के कीट लगने या पौधों में किसी तरह की बीमारी होने का मामला सामने नहीं आया है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे 1 साल में ही फल देने लगते हैं।


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