मुम्बई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट की 14वी बरसी पर पत्रकार जय प्रकाश सिंह जी की कुछ यादें


प्रस्तुति : रितेश वाघेला


मुम्बई  : 14 साल बीत गए, लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे कल ही बात है। यही समय था जब उस दिन मैं दक्षिण मुम्बई के ताड़देव कोर्ट में प्रीति जिंटा से जुड़ा एक केस कवर कर रहा था। शाम 6 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 34 मिनट तक एक के बाद एक हुए इस 7 स्टेशनों पर हुए इस धमाके की पहली खबर विसुअल के साथ माहिम स्टेशन ने मुझे ब्रेक करने का मौका मिला था। उस वक़्त में प्रीति जिंटा द्वारा एक अखबार के खिलाफ फ़ाइल किये गए एक केस की हेरिंग में ताड़देव कोर्ट में था।


आज भी वो शाम याद है, 6 बजकर 24 मिनट पर पहले धमाके की खबर खार सब वे से आई। जब तक मैं प्रणय प्रभाकर रेलवे पीआरओ से खबर कन्फर्म करता दूसरी खबर बान्द्रा स्टेशन से आई। मैंने सीएनएन आईबीएन की एक टीम को बान्द्रा का पता लगाने को कहा तब तक आज तक के मित्र आरिज चंद्रा ने बताया खार और बान्द्रा नही, बल्कि माहिम रेलवे स्टेशन पर हुआ है--तब तक मेरी कार कैमेरामन दिग्विजय के साथ दादर पहुंच चुकी थी। इतने में जोगेश्वरी स्टेशन की खबर आई, मैंने रवि आंबेकर को बोलकर ओबी माहिम रेलवे स्टेशन पर बुलाया क्योंकि मैं बस वहां पहुंचने ही वाला था। बरसात बहुत थी इसलिए 2 रिपोर्टर की छुट्टी केंसल करवा कर हमने सुबह उनको फील्ड पर बुला लिया था। इन दोनों को मैंने खार और बान्द्रा मूव करने को कहा। इतने में एक और खबर आई कि बोरीवली रेलवे स्टेशन पर धमाका हुआ है।



मैंने तुरंत अपने मोबाइल की बेटरी बदली। उस वक़्त पोर्टेबल चार्जर का चलन कम था, तो मैं अपने साथ मोबाइल चार्जर और 3 बेटरी एक्स्ट्रा लेकर चलता था। इंडियन मुजाहिद्दीन का दौर था। इसलिए 2005 से लगातार बम धमाके शुरू हो गए थे।


अब तक मैं माटुंगा स्टेशन के पास पहुंच रहा था कि हमारी गाड़ी को पुलिस ने रोक दिया। 2 किमी लंबा जाम लग गया था। लोगो की भीड़ हमने रोड पर पैदल भागते देखी। हम भी अपना कैमरा निकाल कर माहिम स्टेशन की तरफ भागे। तब तक दिल्ली का कॉल आ गया। फोनों शुरू, थोड़ी देर में कॉल कट, दिल्ली से एक सीनियर का कॉल आया- "कितने स्टेशन बता रहे हो तुम, 5 ?


मैंने कहा सर अब तक 5 स्टेशन की ही खबर आई है। वो बोले पहले खबर कन्फर्म करो पूरी और तब कॉल करो। हमारा दफ्तर लोवर परेल में था और मैंने ताड़देव से निकलते समय ही ओबी को खार जाने बोल दिया था, लेकिन दादर पहुंचते पहुंचते मैंने ओबी को माहिम पर रुकवा दिया।


भारी बरसात- कैमरा संभालते, भीड़ में हम अब तक माहिम स्टेशन के बाहर पहुंच गए थे। भारी कोलाहल, भाग दौड़, एम्बुलेंस, पुलिस की गाड़ियां, अंदर जाने की अनुमति नही। मै किसी तरह अंदर घुसा, एक ट्रेन रुकी थी जिसके 2 डिब्बो के परखच्चे उड़ चुके थे। उफ्फ, वो दृश्य- आज भी जेहन में स्टेम की तरह जम गया है। तुरंत मैंने वाक थ्रू,विसुअल्स बनाने शुरू किए। इतने में पता चला कि मेरे सहयोगी प्रकाश तिवारी जी भी माहिम पर कवरेज कर रहे है। तोरल वारिआ भी माहिम पहुंच कर कवर कर रही थी। मैं फीड देकर आगे बढ़ना चाह रहा था, बाहर रोड पर निकला।



ओबी पर पहुंचा तो ओबी गायब। पता चला ओबी को पुलिस ने दूसरी लेन में लगवा दिया है क्योंकि कुछ पता नही अभी वहां कितने और बम प्लांट किये गए होंगे। में ओबी पर भागा- फीड भेजी। इतने में कॉल आया, खार भागो… में तुरंत एक मोटरसाइकिल वाले को पकड़ा मुझे नही पता आज तक वो कौन था…लेकिन मैंने उसको ईस अंदाज में लिफ्ट मांगी की वो मना नही कर पाया। मैंने कैमेरामन को भी बाइक पर बिठाया और भागा खार। रास्ते में उसी बाइक पर सड़क पर चलती हजारो की भीड़ भी कवर करता गया। पुलिस ने कई जगह रोका। आईडी कार्ड दिखाते पहुंचा खार सबवे… वहां पहुंचकर तुरन्त इनपुट करना शुरू किया। चेम्बूर की दूसरी ओबी खार मूव हो चुकी थी। साढ़े 7 बज गए, फोनों जारी था… ओबी पहुंची- अब तक मेरे पास 1 घंटे की फीड इकठ्ठा हो चुकी थी। खार सब वे के पास एक लोकल के फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में ये धमाका भी हुआ था।कई पैसेंजर की बॉडी के अंग 500 मिटर तक जाकर गिरे थे। बहुत बारिश और उसमें ये कवरेज… सारी लोकल बंद कर दी जा चुकी थी।


उधर प्रकाश तिवारी जी भी खार ट्रेक पर पैदल पहुंच गए थे। वो ऐसा माहौल था कि कुछ समझ नही आ रहा था कौन कहा है। हर जगह चीख पुकार, मदद, गुहार, भाग दौड़ का सीन था।


खार सब वे से रेलवे ट्रैक पकड़कर मैं बान्द्रा स्टेशन गया वहाँ भी इनपुट किया। एक ट्रेन में वहां भी धमाका हुआ था। बान्द्रा से जो भी इनपुट में कर रहा था पैदल रेलवे ट्रैक पकड़कर खार ओबी पर लाकर भेज रहा था। उसी समय मेरे दूसरे सहयोगी राकेश त्रिवेदी जोगेश्वरी स्टेशन, संजय प्रभाकर जी माहिम रेलवे स्टेशन, रवि आंबेकर हॉस्पिटल, सीएनएन आईबीएन की 4 टीम रिपोर्टर मीरा रोड, भगवती, कूपर, भाभा अस्पताल पर पहुंची थी… और 4 साथी और भी फील्ड पर आ चुके थे। उस समय हमारी टीम बहुत बड़ी थी। करीब 30 रिपोर्टर पूरे ग्रुप चैनल्स के हुआ करते थे जिसमें सीएनबीसी, आवाज, आईबीएन भी शामिल थे। ये कवरेज रातभर चलती रही। उस रात में 3 बजे घर गया और सुबह 6 बजे फिर निकल गया। घर मोबाइल चार्ज करने आया था।



वैसे तो मैंने मेरे पत्रकारिता केरियर में 25 से ज्यादा बम धमाके और आतंकी हमलों की कवरेज की है लेकिन मुम्बई का ये सीरियल ट्रैन ब्लास्ट बिल्कुल दिल दहला देने वाला था। 1993 के सीरियल ब्लास्ट की तर्ज पर इसे पाकिस्तान के बहावलपुर से लश्करे तैयबा ने अंजाम दिया था और इसमे 7 भारतीय स्लीपर सेल ने भी बड़ा रोल निभाया था जिसमे कुछ पहले सिमी के सदस्य थे। इसमे बिहार, कोलकाता, मीरा रोड, चेम्बूर के स्लीपर सेल का अहम रोल था। चेम्बूर में ऐहतशाम के घर प्रेशर कुकर बम बने थे, अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स पाकिस्तान से आया था, कुकर सांताक्रुज से खरीदा गया था। घड़ी, काले बैग और टाइमर बान्द्रा से खरीदे गए थे। पाकिस्तानी आतंकी मीरा रोड, बोरीवली, मुम्ब्रा, बान्द्रा और चेम्बूर में रुके थे। 7 जुलाई को पाकिस्तानी आतंकी नेपाल, बांग्लादेश और गुजरात के रास्ते मुम्बई आये थे। 3 दिन रेकी की गई थी। स्टॉक एक्सचेंज पर भी धमाका करना था लेकिन बाद में लोकल के फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट को चुना गया।


2-2 लोगो का पेअर चुना गया। एक पाकिस्तानी दूसरा भारतीय। चर्चगेट से अलग अलग लोकल में हर पेयर चढ़ा और बम की बैग रखकर उतर गया। 1 पाकिस्तानी आतंकी को उतरने में देर होने से वो भी धमाके की चपेट में आ गया था। इस केस में 3 लोगो को फांसी और 8 को उम्रकैद मिली थी, सजा 2015 में सुनाई गई थी स्पेशल कोर्ट द्वारा। 2 लोगो को बरी किया गया था। इस धमाके में 188 लोग मारे गए थे जबकि 813 से ज्यादा घायल हुए थे। इस धमाके पर अब तक 5 फ़िल्म बनी है जिसमे अक्षय कुमार की हॉलिडे लेटेस्ट फ़िल्म है जबकि नसरुद्दीन शाह की वेडनसडे फ़िल्म भी इसी तर्ज पर बनी थी।


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