गौतम बुद्ध ने कहा - चींटी को जिंदगी दे नहीं सकते तो इंसान को लाश बनाने का अधिकार कहां से पा गए ?


- सलिल पांडेय


कथा मार्मिक के साथ पाषाणवत व्यक्ति के हृदय को मोम की तरह पिघलाने वाली भी है ।


मगध के श्रावस्ती जिले में एक दिन गौतम बुद्ध आए । पूरे शहर को सहमा और डरा हुआ पाया । पता चला कि पास के जंगल में अंगुलिमाल नाम का एक दुर्दांत व्यक्ति रहता है। वह उधर से गुजरने वालों की हत्या कर उनकी उंगलियों की माला पहनता है ।
अंगुलिमाल था तो विद्वान पर गुरु-आश्रम में गुरुपत्नी पर कुदृष्टि के चलते श्रापित हो गया था और उसे 100 हत्याओं का दंड भुगतने के लिए विवश होना पड़ा ।


गौतम बुद्ध को जब मालूम हुआ तो वे उसी जंगल के रास्ते जाने के लिए उद्यत हुए। लोगों ने मना किया । यहां तक कि सम्राट अशोक के पिता विन्दुसार जो मगध के राजा थे, वे भी अंगलिमाल के आतंक से पीड़ित थे।


लोगों के मना करने के बावजूद गौतम बुद्ध जब जंगल की ओर गए तो वे बढ़ते चले जा रहे थे । पीछे से आवाज आई- ऐ संन्यासी, ठहर जा । गौतम बुद्ध तो पलट कर बोले मैं तो ठहर गया हूँ तू कब ठहरेगा ?


अंगुलिमाल ने ऐसा राहगीर तो अब तक न देखा था। बोला- तू मुझे जानता नहीं।


बुद्ध बोले-मैं तो खुद को जानता हूं पर तू हीं खुद को नहीं जानता है, मैं पूछता हूं कि तू कब ठहरेगा ?


अंगुलिमाल आश्चर्यचकित हुआ और मतलब पूछा ।


बुद्ध ने कहा-मेरा मन ठहर चुका है। मन ठहर जाता है तो पूरी दुनियां ठहर जाती है। तेरा मन ही नहीं ठहरा है। एक काम कर । तू मुझे मार देना । मैं भागने वाला नहीं । भागना होता तो इधर आता नहीं । एक काम मेरा कर दे । फिर मुझे मार देना ।


अंगुलिमाल ने पूछा-क्या काम करना है ?


बुद्ध ने कहा- जिस पेड़ के नीचे तू खड़ा है, उस पेड़ से कुछ पत्ते तोड़ कर ला ।


अंगुलिमाल बोला-पत्ते ही क्यों, मैं पूरी डाल फरसे से काट कर लाता हूँ और वह एक मोटी डाल तोड़कर बुद्ध के आगे रख दी।
बुद्ध ने कहा-जा इसे अब जोड़ दे ।


अंगुलिमाल ने कहा-यह कैसे संभव है ?


बुद्ध ने कहा-जब जोड़ नहीं सकते तो फिर कौन से बहादुर हो तुम । डाल तो एक बच्चा भी काट सकता है। एक चींटी को जीवन दे नहीं सकते तो फिर जीवन लेने का अधिकार तुम्हें किसने दे दिया ?


अंगुलिमाल ने खंजर बुद्ध के चरणों में रख दिया और उनका शिष्यत्व स्वीकार लिया ।


इसी तरह की कथा रत्नाकर डाकू की भी है। जिसका हृदय परिवर्तन नारद ने किया और वे आदि कवि वाल्मीकि हो गए।


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