दिल्ली मे लटकते मौत के तार


द्वारका सेक्टर-4 में सड़क पर लटकते तार के गले में फसने दो पत्रकार बुरी तरह चोटिल होकर जानलेवा हादसे का हुए शिकार


रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया


दिल्ली : जिला द्वारका सेक्टर-4 न्यू ज्योति अपार्टमेंट के सामने रोड पर इंडिया टाइम्स 24 न्यूज़ पत्रकार व कैमरामैन अपनी बाइक से सेक्टर-12 की तरफ कवरेज करने जा रहे थे, तभी केबल ऑपरेटर की लापरवाही से सड़क पर लटकते हुए तार बाइक सवार पत्रकार दीपक के गले में फांद की तरह फसते हुए बाइक के दोनों टायरों मे उलझने से बाइक का बैलेंस बिगड़ने से दोनो काफी दूरी पर जाकर सड़क के बीच तेज गति से गिरते हुए बुरी तरह चोटिल हो गए। गनिमत यह रही कि सड़क पर पीछे से आ रही कार के नीचे कुचले जाने जैसे हादसे का शिकार होने से बच गए। पत्रकार दीपक अनुसार कैमरामैन नीरज को काफी गंभीर चोटें आई हैं। उसके सर में चोट लगने से काफी टाँके व दाहिने बाजू की कुहनी की हड्डी के टूटने से उसका इलाज द्वारका के भगत-चंद्रा अस्पताल में चल रहा है। समझ नहीं आता दिल्ली प्रशासन विभाग की नाक के नीचे इस तरह अवैध रूपीय कार्यशैली को प्रगति देने का असली दोषी गैर-जिम्मेदाराना प्रशासन विभाग नहीं तो और कौन?


आपको द्वारका के इलावा समस्त दिल्ली के अंदर हर रोड पर केबल-ऑपरेटरों द्वारा लापरवाही से बिछाए गए इस कदर मौत के तार लटकते हुए दिखाई दे जाएगे। इस उपलक्ष में दिल्ली-निवासियों ने दिल्ली सरकार के प्रति भारी रोष-व्यक्त करते हुए कहा, हमारे द्वारा दिए जा रहे टैक्स के बदले हमें सरकार इस तरह जन-संरक्षण सुविधाएं उपलब्ध करवाते हुए मौत के घाट उतारने पर अमादा है। आखिर इस तरह की अवैध-कार्य प्रणाली को प्रशासन-विभाग की मिलीभगत के बिना कैसे अंजाम दिया जा सकता है ? क्या हमारी दिल्ली जन संरक्षण हेतु अवैध-कार्यशैली पर सख्ती से कार्रवाई करते हुए उचित मापदंड के तहत कार्यवाही करते हुए दिल्ली की सड़कों को महफूज बनाने में कामयाब हो पाएगी ? क्या दिल्ली निवासियो की जान की कीमत जानवरों से भी बदतर हो गई है ? जो आज देश की राजधानी की सड़कें जंगल की उपस्थिति का एहसास करवाते नजर आ रही हैं। आखिर सरकारी खंभों की स्ट्रीट लाइटों पर कैसे बिछ जाता है मौत का यह जाल ? हर एक प्रशासन अपनी जिम्मेदारी को दूसरे प्रशासन विभाग पर थोपता हुआ नजर आता है और समस्त-दिल्ली के अंदर अवैध-रूप से लटकते यह तार सड़क पर चलने वाले हर आमजन के लिए मौत का सबब बने हुए हैं,अब दिल्ली राजधानी की जनता करे सवाल,क्या इन मौत के तारों पर कभी लग पाएगी सही से लगाम ? या मौत के इस खेल का जारी रहेगा इसी तरह का यह घिनौना काम ?


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