धंधे में समाधान ना करने वाले हम धर्म में समाधान क्यू करे ?


✍️  हार्दिक हुँड़िया


आज से चातुर्मास शुरु हो रहा है, कल और आज खमतख़ामना के बहुत संदेश आये वे ज़रूर नई ग़लतियाँ नहीं करेंगे ।परवाधिराज पर्यूशन महापर्व भी जल्दी आएँगे। चातुर्मास में ख़ुद की आत्माका कल्याण करने वाले पंच महाव्रत धारी, छ काय जीवो के रक्षक साधुजी और साध्वीजी महाराजा हमारी आत्मा का भी कल्याण करने पधारे है, सब से बड़ें ये हमारे उपकारी है । इनकी जितनी भी वैयावच करो उतनी कम है। उन्होंने सब कुछ छोड़ा है , संसार का त्याग किया है, एक एक नियम जो पाल रहे है दुनिया में इस से बड़ा चमत्कार और क्या होगा ?


हार्दिक हुँड़िया ने कहा की एक भी रूपिया पास में रखने की बात तो छोड़ो टच भी नहीं करते है। शाम को सूर्यास्त के बाद और सुबह की नवकारसी ना आये तब तक अन्न जल का त्याग, आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन, सर के, दाढ़ी के बाल का लोच करना, आजीवन वीहिकल का त्याग करने वाले और भी कठिन से कठिन जीवन जीने वाले, जिनकी एक आवाज़ पे करोड़ों रूपैया की बोली लोग बोल देते है ऐसे परम उपकारी महात्मा हमारे संघ के सब कुछ है। हमारा यह भव और परभव दोनो सुधारने वाले अनंत उपकारी महात्मा ये राष्ट्र की धरोहर है । ये चातुर्मास में हमें ध्यान रखना है की हम हमारे धंधे में समाधान नहीं करते है तो धर्म में क्यू करे ? जो महात्मा धर्म में समाधान करने की बात करता है वो ना साधु है ना श्रावक । चतुर्विध संघ कभी भी धर्म में समाधान नहीं करता । ये धर्म में समाधान करने वाले अंगुली पे गिने जाये ऐसे साधु वेश में बैठे बहुरूपैया से भी ख़राब है । एक सड़ा हुया आम पूरी आम की भरी हुईं टॉपली को ख़राब कर देता है तो ऐसे सड़े हुये आम को उठाके बाहर फ़ेक दो क्यूँकि अच्छे आम को कुछ नहीं होना चाहिए ।


कोई साधु किसी संसारी काम की अनुमोदना करता है या करने को कहता है तो वो साधु नहीं है , यदि साधु है तो संसार के कार्यों की बात क्यू करता है ? एक साधु समजो की अपने प्रवचन में कोई इंस्युरस कम्पनी का प्रचार करता है तो क्यू करता है?


ये तो संसार के लोगों की बात है ? साधु वेस में वो इन्शुरन्स कंपनी से कमीशन खाता है ? संसार त्याग करने वाले ये साधु के वेश में बैठा बहुरूपिया से ख़तरनाक ढोंगी क्यू रूपैया लोगो का डुबाने में लगा है ? कुछ लोगों के इंस्युरस पास हुये होंगे उनको शायद मेरी बात अच्छी ना भी लगे । लाखों लोगों के इन्शुरन्स में समाज के अरबों रूपैया चले जाये और करोड़ों का वापस आये तो ऐसा मूर्खता वाला धंधा कौन करेगा ?


गुजरात के ईडर में एक महिला के साथ दो साधु ग़लत कार्य करने की जो विदीयो बाहर आइ इस से हमारा सब का सर शर्म से नीचा हो गया ।


ना होने वाली ऐसी घटना करने वाले अंगुली पे गिने जाये ऐसे लोगों के कारण अब हमारा पूरा समाज ना बदनाम हो इस लिये सब जागो और ऐसे लोगों को वापस संसार में भेज कर  ऐसे सिथिलाचारीओ को कह दो हमार संघ उजला था , उजला है और उजला ही रहेगा ये । हार्दिक हुँड़िया की आप सभी को दो हाथ जोड़ कर विनती है की हम हमारे धंधे में समाधान नहीं करते है तो धर्म में क्यू करे ?


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