Bhadohi : सितम्बर माह में पल्स पोलियो का प्रथम चरण को मिली हरी झंण्डी


13 माह बाद फिर से पिलाया जायेगा पल्स पोलियो का खुराक


रिपोर्ट : नीलू सिंह/अरूण शुक्ला


ज्ञानपुर/भदोही, (उ0प्र0) : कोविड.19 को लेकर देश व प्रदेश में लाकडाउन लगा दिया गया जिससे चलते स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों को रोक दिया गया था। अब लाकडाउन हटने के बाद प्रदेश प्रमुख सचिव के आदेश के बाद प्रदेश में एक के बाद एक सभी योजनाओं को चालू किया जा रहा है। इसी के तहत पल्स पोलियो का प्रथम चरण सितम्बर माह में करने का आदेश मिलते ही विभाग सक्रिय रूप से अभियान के तैयारियों में अभी से जुट गया है।


मुख्य चिकित्साधिकारी बताया कि कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लाकडाउन के बाद रोके गये कार्यक्रमों को एक बार फिर से चालू करने के लिए प्रदेश सरकार हरी झण्डी मिल गई है। परिवार कल्याण के कार्यक्रम की शुरूआत करने के लिए प्रदेश के महानिदेशक ने पत्र के माध्यम से मुख्य चिकित्साधिकारी को अवगत कराया है। पत्र में 20 सितम्बर 2020 से पल्स पोलियो अभियान चलाने की बात को कहा गया है।


जिला कार्यक्रम प्रबन्धक ने बताया कि पोलियो एक संक्रामक रोग है। यह बीमारी बच्चों के किसी भी अंग को आजीवन के लिए कमजोर बना देता है। पोलियो एक लाइलाज बीमारी होता है। बचाव ही इस बीमारी का एक मात्र उपाय है। पोलियो से ग्रसित बच्चों में से एक प्रतिशत से भी कम बच्चों में लकवा होता है। बच्चों में पोलियो विषाणु के विरूद्ध किसी भी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता नही होता है इसी कारण यह बीमारी प्राय बच्चों में ही होता है।


प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया किया जनपद में पिछले वर्ष जून माह में पोलियो टीम द्वारा 2 लाख 10 हजार  घरो में सम्पर्क कर 0.5 वर्ष तक के कुल 278725 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस दौरान छूटे हुये कुल दो लाख इकहत्तर हजार चार सौ बच्चो को दवा पिलायी गयी।


बचाव के उपाय


मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि पोलियो वायरस के विरूद्ध प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम व पल्स पोलियो के अभियान के तहत पोलियो वैक्सीन बच्चों को देने का कार्य किया जाता है। यह खुराक 05 वर्ष के कम उम्र वाले ही बच्चों को दिया जाता है। बार.बार और एक साथ खुराक दिये जाने से 05 वर्ष के बच्चों में बीमारी से लड़ने की एक साथ क्षमता बढ़ती है। बच्चों को नियमित खुराक देने से बच्चों के शरीर में होने की आंशका कम हो जाती है। जिससे इस खतरनाक बीमारी को खत्म किया जा सकता है।  


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