" तुम सँग मिलन की है हसरतें "


✍️ अंजू जांगिड़ (पाली, राजस्थान)


तुम सँग मिलन की है हसरतें,
मेरे नैना रिमझिम से है बरसते।


तू मुझे याद बहुत आता है,
तेरे यादों में हम है महकते।


रात ढलते ही परवाने,
जलने के लिये है तरसते।


कटी जो तुम बिन मेरी जिंदगी,
कहीं रह न जाये अधूरी है हसरतें।


तुम्हे लिखने को अब,
मेरे लफ्ज अब है मचलते।


नींद हो तो ख़्वाब है,
रूबरू देखने को हम है तरसते।


रिमझिम जब फुआर पड़े,
तो "अंजू" के कदम है बहकते।


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