सोशल-मीडिया की थाली में व्यंजन ही व्यंजन, जूठन से भी पेट भरा जा रहा


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : सूचनाओं का त्वरित प्रवाह न्याय की मंजिल की ओर जाता है। इस काम मे सोशल मीडिया की अहम् भूमिका है। सोशल मीडिया के पंख के सहारे तेजी से उड़ती सूचनाओं/जानकारियों/खबरों से व्यवस्था तंत्र की दृष्टि पड़ती है।


इस दृष्टि से वर्तमान दौर में उनका स्वागत और अभिनन्दन जो सामाजिक दायित्वों के लिए सजगता की नदी बहा रहे हैं । सजग करती खबरों के पीछे संवाद तंत्र के अन्य कल-पुर्जे उसी अनुसार बाध्य होकर अनुगमन कर रहे हैं ।


जो कभी खबरों के मामले में स्वत्वाधिकार की बात करते थे, समाज के लोगों की अपेक्षाओं के प्रति उपेक्षात्मक रवैया अपनाते थे, वे अब सोशल मीडिया की थाली देखते हैं कि इसमें कुछ बचा मिल जाए तो पेट भर लें । लिहाजा बहुतेरे बासी भोजन कर-करा रहे हैं।  हलांकि चाहते नहीं कि कोई उनपर आरोप लगाए कि वे अब जूठन खाने लगे हैं । वह दिन दूर नहीं जब ये अपनी सार्थकता को क्षीणतम न कर दें । जब होमवर्क बंद हो जाता है तो आत्मविश्वास कम होता है। ऐसे में व्यवस्था इनसे नहीं  बल्कि ये व्यवस्था के आदेश-निर्देश पर चलने के लिए बाध्य होंगे। ऐंठन कम करना ही पड़ेगा।


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