पदपादाकुलक छंद " श्रमवीर "


✍️ श्लेष चन्द्राकर


श्रमवीरों को सम्मान मिले।
दुनिया में नव पहचान मिले।।
हित में उनके सब काम करे।
बन उत्तम मानव पीर हरे।।


श्रमवीर सभी खुशहाल रहे।
कोई भी न यहाँ पीर सहे।।
कड़वे न दु:ख के घूंट पिये।
वे जीवन आलीशान जिये।।


श्रम कर जो है स्वेद बहाते।
वे विकास की गंगा लाते।।
जग में जो नव निर्माण करें।
आओ उनका गुणगान करें।।


हर श्रम साधक को काम मिले।
जो वाजिब हो वह दाम मिले।।
बाहर फिर न पड़ेगा जाना।
घर में जब मिल जाये खाना।।


श्रम करने से पीछे न रहे।
जो सर्दी गर्मी धूप सहे।।
हम दिल से उन्हें प्रणाम करें।
उनकी सेवा अविराम करें।।


 


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