न्यायालय परिसर एवं न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा हेतु दिशा-निर्देश जारी


रिपोर्ट : एडवोकेट विनीत दूबे


प्रयागराज, (उ0प्र0) : न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा एवं जिला न्यायालय परिसर सहित न्यायिक कार्य से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा के संबंध में रजिस्ट्रार जनरल ने अपर मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा, जिसका संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के संबंध में तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए, जिससे संबंधित अधिकारियों के साथ भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना घटित ना हो। उपरोक्त मामले पर त्वरित कार्यवाही करते हुए पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश ने जनपद में स्थापित जिला एवं सत्र न्यायालय तथा अधीनस्थ न्यायालय परिसर व न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में दिशा- निर्देश जारी किए।


माननीय न्यायाधीशों के आवास से न्यायालय आने व जाने के मुख्य मार्गों पर स्थानीय पुलिस द्वारा सतर्क एवं सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और समय-समय पर पुलिस अधीक्षकों द्वारा इसकी समीक्षा भी की जाए। जनपदों में न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था हेतु आवंटित पी.ए.सी बल का प्रयोग माननीय सत्र न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था हेतु ही किया जाए। उनकी ड्यूटी अन्यत्र कहीं न लगाई जाए। न्यायालय परिसर में किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए क्यू.आर.टी को सक्रिय रखा जाए। न्यायालय परिसर में केवल न्यायिक अधिकारियों, न्यायाधीशों व कार्यालय स्टाफ के वाहनों का ही प्रवेश हो।


प्रायः वादकारियों और अधिवक्ताओं के वेश में अनाधिकृत और अराजक तत्व परिसर में प्रवेश कर जाते हैं, अतः इस विषय में बार के पदाधिकारियों से विचार- विमर्श कर समस्त स्टाफ के लिए पहचान-पत्र की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। न्यायालय परिसर में प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश-द्वार सीमित संख्या में रखे जाएं। न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को जांचने के लिए मॉकड्रिल की व्यवस्था कराई जाए, साथ ही प्रवेश-द्वारों के मेंटल डिटेक्टर, स्केनर, सीसी टीवी कैमरे, बायोमेट्रिक मशीन, डी वी आर आदि सभी उपकरणों की समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाए। न्यायालय परिसर के साथ-साथ न्यायिक अधिकारियों के आवासीय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ होनी चाहिए।


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