Mirzapur : विन्ध्याचल मंदिर खुलने पर सुर्यग्रहण का अग्रिम दुष्प्रभाव दिखने लगा है


30 जून तक मंदिर खुलने पर मंडरा रहे संशय के बादल


DM की प्लानिंग : पर्यावरण संतुलन में कूद रहा वन एवं परिवहन विभाग साथ-साथ


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : धार्मिक स्थलों को खोलने की तिथि 8 जून के पहले से ही विंध्यक्षेत्र को यह एहसास-सा होने लगा था कि इस देवी-धाम को अदृश्य कोरोना वायरस से तब तक युद्ध करना है, जब तक वह सम्पूर्ण मानव-समाज को मुक्त करने के लिए हार नहीं मान देता हैं। इस तारीख से जगह-जगह मंदिर/मस्जिद तथा अन्य धर्म स्थल खुलने लगे लेकिन विंध्यपण्डा समाज के हृदय से आवाज आने लगी कि हम दर्शनार्थी-हित के मामले में हड़बड़ी में नहीं हैं। ऐसी ही आवाज इसी समाज के नगर विधायक की भी थी। लोग आश्चर्यचकित थे कि क्यों नहीं मंदिर खोला जा रहा है ? कुछ उतावले भी थे लेकिन मां विंध्यवासिनी को अभी कोरोना से युद्ध करना ही मंजूर था।


यदि खुलता तो फिर 2 दिन बाद बंद ही होता - मंदिर 8 या 9 जून को खुल जाता तो 10 जून को बंद ही हो जाता क्योंकि इसी दिन एक पंडा-परिवार पर धमक के आए कोरोना के चलते विंध्याचल मंदिर की सारी गलियां सीज कर दी गई हैं। मंदिर के पास पश्चिम मोहाल हाट-स्पॉट घोषित हो गया है।


सूर्यग्रहण, 21 जून का अग्रिम दुष्प्रभाव - पुरोहित वर्ग शुभ तिथि का विचार कर योगिनी एकादशी, 17 जून से मंदिर खोलने पर विचार कर रहा था कि सूर्यग्रहण 21 जून के 4 दिन पहले ही इस तिथि पर ग्रहण का कुप्रभाव पड़ गया है।


जून में खुलना संभव नहीं - इस महीने में मंदिर खुलना संभव नहीं प्रतीत हो रहा है। क्योंकि पॉजिटिव की रिपोर्ट 10 जून को आई हैं। इस रिपोर्ट के 12 दिन बाद फिर दुबारा सैम्पल लिया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट 4-5 दिन में आएगी। इस प्रकार 26-27 तारीख बीत जाएगी। रिपोर्ट सही सलामत आने पर पंडा समाज  मंदिर खोलने का पत्र प्रशासन को देगा। जिस पर निर्णय होने में 2-3 का समय लगेगा। इस प्रकार 30 जून बीत जाएगा। 1 जुलाई को शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी होगी। इसके बाद सूर्यदक्षिणायण होंगे। अतः संभावना दिख रही कि मंदिर खुलने की तिथि 1 जुलाई ही मां विंध्यवासिनी को स्वीकार है। 


नगर विधायक और पंडा समाज की एकमत राय - विधायक रत्नाकर मिश्र, पण्डा समाज के अध्यक्ष पंकज राय, मंत्री भानू पाठक, पूर्व कोषाध्यक्ष गौतम द्विवेदी सभी इस बात पर शुक्रवार, 12 जून को एकमत दिखे कि जब अपने ही समाज पर पहली बार कोरोना का कहर बरपा है, ऐसी स्थिति में कोई निर्णय लेना उचित नहीं। इसी परिवार का एक सदस्य उस कमेटी का लिपिक है, जिसके अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव क्रमशः DM, SP एवं सिटी मजिस्ट्रेट हैं।


आपदा का ग्रहण - ज्योतिषीय दृष्टि से आषाढ़ महीने में सूर्य ग्रहण और 4 ग्रहों की बन अशुभ स्थितियां प्राकृतिक आपदा का ही संकेत दे रही हैं। वैसे भी जिस महीने 5 शनिवार और 5 रविवार पड़ते हैं तो रोगों के संक्रमण का खतरा रहता हैं। आषाढ़ में 6 जून से 5 जुलाई के बीच 5-5 शनिवार और रविवार का योग बना है। इस महीने में 18 जून से ज्यादा वर्षा, समुद्री चक्रवात, भूकंप, तूफान और महामारी से जन-धन की हानि के खतरे का आकलन किया गया है। 


पर्यावरण संतुलन के लिए वन विभाग के अभियान रथ के दौड़ाएगा परिवहन विभाग - प्राकृतिक आपदा को रोकने लिए पौधरोपण का मार्ग ही बचता है। DM सुशील कुमार पटेल की प्लानिंग के तहत इस बार वन विभाग अकेले 22 लाख पौध और बीज-रोपण अभियान के लिए तीर-कमान की जगह हथौड़ा-फावड़ा लेकर उतर रहा है। इस अभियान के नायक द्वय होंगे CCF रमेश झा एवं DFO राकेश चौधरी। सभी सरकारी विभागों द्वारा 54 लाख पौध-बीज रोपण किए जाएंगे जिसमें वन-विभाग 15 पौध एवं 7 लाख बीज लगाएगा। इस बार बीजरोपण इसलिए भी किए जा रहे हैं कि किन्हीं कारणों से पौध नष्ट हो गए तो पास-पास लगे बीज वर्षा ऋतु में पेड़ बन कर निकल सके।


अभिनव प्रयोग परिवहन विभाग का - इस अभियान में परिवहन विभाग गतिशीलता के लिए अभिनव प्रयोग करेगा। एक अप्रैल से BS-6 वाहनों की खरीद वाले लोगों से वचन ही नहीं बल्कि लाइसेंस देने के पूर्व इसे यादगार दिवस बनाने के लिए कहेगा और एक पेड़ देकर उसे रोपित कराएगा । इस विभाग में RTO प्रशासन डॉ आर के विश्वकर्मा एवं RTO प्रवर्तन श्री ओपी सिंह के पर्यावरण के उत्कृष्ट-भावों को देखते हुए ARTO रविकांत शुक्ल 35 सौ वृक्षों को 15 जून से ही लगाने के लिए प्रणायाम करते दिख रहे है। वे जिले के कोने कोने में जागरूकता के लिए भ्रमणशील हैं ।


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