Mirzapur : लॉकडाउन के बंधन का असर दिखा शीतला माता के हिंडोले पर, नहीं दिखे दर्जनों झांकी, सैकड़ों फरहरे

छोटी माता से निकले हिंडोले में कोरोना से रक्षा के हो रही थी अपील


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर। चेचक की बीमारी से बचाव के लिए विशेष रूप से पूजित होने वाली शीतला माता के  हिंडोले पर लॉकडाउन का पूरा असर दिखा । नगर में ही दर्जनों शीतला मंदिरों से निकलने वाले हिंडोले एक तो सिर्फ वहीं से निकल सके जहां के पुजारियों एवं व्यवस्थापकों ने प्रशासन ने अनुमति प्राप्त कर ली थी तो दूसरी ओर सशर्त अनुमति में लोकल डिस्टेंसिंग का विशेष ख्याल रखते हुए नगर-परिक्रमा यात्रा में 'आपस में दूरी बनाए रखें' की तख्ती लेकर कार्यकर्ता चल रहे थे। सामाजिक दायित्व निर्वाह के क्रम में इस धर्म यात्रा में 'शीतला माता की जयकार के साथ 'कोरोना बीमारी दूर हो' की भी मनौतियाँ हो रही थी।


दर्जनों हिंडोले की झांकी की जगह सिर्फ एक झांकी - ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शीतला माता की निकासी के पर्व पर इस बार किसुनप्रसाद की गली, छोती माता से सिर्फ एक झांकी निकल पाई। शहनाई की धुन सुनकर लोग घरों से निकलकर प्रसाद चढ़ाए और दूर से ही शीतला माता की भव्य प्रतिमा को प्रणाम किए। 3 फीट की दूरी की वजह से लोग झांकी का स्पर्श नहीं कर सके।



अन्य सालों में दर्जन भर झांकिया निकलती थीं - सैकड़ों वर्ष के टूटे रिकार्ड के दौर में इस वर्ष गुरुवार, 4 जून को निकले हिंडोले में बैंडबाजे और ढेरों फरहरा नहीं दिखे । इसके पीछे कारण यह था कि चेचक की बीमारी से मुक्ति के अलावा घर-घर में सकुशल विवाह संपन्न होने तथा अन्य मनौतियां पूरी होने पर लोग अपनी ओर से हिंडोला बनवाते थे और निकासी की इस यात्रा में घर के सदस्य खुद लेकर चलते थे । इस वर्ष लॉकडाउन के कारण एक तो विवाह आदि स्थगित हो गए तो दूसरी ओर दुकानों की बंदी से घटी आय के चलते भी हिंडोले में लोग अपनी झांकी लेकर नहीं चल सके ।


शंकरगढ़ जाएगी झांकी - नगर परिक्रमा के बाद यहां से निकले सभी हिंडोले पूर्णिमा तिथि को प्रयागराज के शंकरगढ़ में स्थापित की जाएंगी। लॉकडाउन के चलते कदमों में पड़े बंधन की वजह से हिंडोले के मार्ग में लोग बड़ी श्रद्धा से झाड़ू-बुहारू खुद करते थे और सड़क की धुलाई करते थे, जो नहीं हो सकी। अलबत्ता कुदरत ने सुबह वर्षा कर दी थी जिससे सड़के धुली हुई सी लग रही थी। हिंडोले के मुख्य संचालक श्री रामजी पंडा, अशोक के साथ अज्जू मालवीय आदि परिक्रमा के सुचारु व्यवस्था में साथ साथ रहे।


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