Mirzapur : कोरोना संक्रमण बदल दे रहा है आस्था के पर्वों का रूप-स्वरूप



  • नहीं निकलेगी रथयात्रा और न ही कांवड़यात्रा

  • सपानेता आशीष यादव और पत्रकार अजय मिश्र के यहां शोक-संवेदनाओं का चल रहा दौर


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : रिमझिम बरसात से तपन कम होकर सुहाने हुए सोमवार का दिन जिला प्रशासन के लिए इस मायने में सुहाना होता दिखा जब DM और SP ने आषाढ़ और सावन में होने वाले झमाझम धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों की बैठक कर कोरोना-संकट की तपन पर चर्चा की। आयोजकों ने अपनी सहमति दी कि सारे कार्यक्रमों का स्वरूप सार्वजनिक नहीं बल्कि घरेलु-स्तर पर ही होगा। मंदिरों, सड़कों और गंगा-घाटों पर जमघट नहीं होगा।


रथयात्रा और सावन के सोमवार का स्वरूप बदला-बदला सा रहेगा


कलेक्ट्रेट परिसर में DM सुशील कुमार पटेल और SP डॉ धर्मवीर सिंह की बैठक में BHP के जिलाध्यक्ष रामचन्द्र शुक्ल के साथ गए पदाधिकारियों ने 22 से तीन दिवसीय रथयात्रा और उसी तरह 6 जुलाई से 3 अगस्त के बीच पड़ने वाले 5 सोमवारों को निकलने वाली कांवड़-यात्रा न निकालने पर राजीनामा प्रस्ताव को Ok कहा। इस बार सावन माह सोमवार, 6 जुलाई से शुरू होकर सोमवार 3 अगस्त को समाप्त होगा। सावन के सोमवार के दिन कांवड़ यात्रा तो निकलती ही थी, शिवमंदिरों पर भारी आस्था उमड़ती थी लेकिन कोरोना की भयावहता से इस बार सब कुछ बदला-बदला सा रहेगा।


गुरुपूर्णिमा - यद्यपि इस बैठक का विषय गुरुपूर्णिमा को लेकर नहीं था लेकिन जिले में सबसे अधिक सक्तेशगढ़ आश्रम के गुरु-महराज स्वामी अड़गड़ानन्द जी ने पहले ही भक्तों के नाम सन्देश जारी कर दिया है कि सभी श्रद्धालु घर से ही गुरु-आस्था व्यक्त करें, जो गुरु-आश्रमों तक पहुंच जाएगी। इस सन्देश का प्रभाव सक्तेशगढ़ से जुड़े सभी आश्रमों पर पड़ा है। अन्य आश्रम भी कोरोना के चलते भीड़भाड़ से बचने पर अमल करते सुने जा रहा हैं ।


 


आर्थिक सुरक्षा के लिए बैंक की चेकिंग किया CO सिटी ने - दो दिनों की बंदी के बाद सोमवार को बैंक खुले तो स्वाभाविक रूप से लाइन लंबी लगी थी। इस लाइन में कोई उचक्का तो नहीं लगा है, इस निगरानी के लिए CO सिटी सुधीर कुमार निकल पड़े और बैंक-बैंक पर दस्तक देते देखे गए। वे जब PNB के सिविल लाइन ब्रांच पहुंचे तो सबसे पहले CC कैमरा चेक किया। एक संभ्रांत महिला जमीन पर बैठकर कुछ लिख रही थी, उसे जमीन नहीं बल्कि कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। बैंक में सलिल पांडेय एवं युवा पत्रकार संजय दुबे से आमना-सामना होने पर बैंकिग सुरक्षा पर चर्चा की। कुछ देर बैंक के बाहर कुर्सी लगाकर सिटी इंस्पेक्टर रवींद्र यादव के साथ बैठे भी। यह सिलसिला अन्य बैंकों पर भी देखा गया।



डोली की विदाई के आंसू सूखे नहीं थे कि अर्थी के आंसू ढलक पड़े - सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने 24 वर्ष की अपनी बेटी की शादी पिछले नवंबर में की थी। उस वक्त बेटी को डोली पर बिठाकर की गई विदाई के आंसू अभी सूखे नहीं थे कि पिछले शुक्रवार को सड़क दुर्घटना में उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। उनके आवास पर सोमवार को परिचितों का जमावड़ा लगा था। श्री यादव मृत्यु के जबरिया खींचने की दास्तां बता रहे थे कि उनके बताने की पीड़ा आसमान तक पहुंच गई और आसमां भी रो पड़ा। पहले रिमझिम फिर झमाझम पानी बरसने लगा। इस हादसे में दामाद घायल है। बेटी का अंतिम संस्कार ससुराल से ही हो रहा है।


मां का स्थान कोई नहीं ले सकता युवा पत्रकार और साहित्यकार अजय कुमार मिश्र की मां के निधन पर उनके श्रीपट्टी (चील्ह) स्थित आवास पर शोक-संवेदनाओं का सिलसिला चल रहा है। श्री मिश्र के ज्येष्ठ भ्राता आनन्द कुमार मिश्र RED में OS हैं। श्री मिश्र के पिता स्व राधेश्याम मिश्र शिक्षक नेता के साथ राजनीति में सक्रिय रहे। मिलनसार परिवारिक पृष्ठभूमि के चलते इनके यहां मां के निधन पर शोक व्यक्त करने वालों का सिलसिला चल रहा है। शोक में वार्तालाप का यही विषय रहा कि मां का स्थान सर्वोपरि होता है। वह सौभाग्यशाली होता है जिसे लम्बी अवधि तक मां की छत्रछाया मिलती है।


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