Mirzapur : डॉक्टर्स की भी मजबूरी समझा करें : डॉ अजय 


डॉक्टर्स डे पर विशेष


रिपोर्ट : टी0सी0विश्वकर्मा


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : हर डॉक्टर अपने मरीज को खुश और स्वास्थ्य रखना चाहता है। इसीलिए कई बार वह अपने मरीज को कड़वी दवा (डांट) भी दे देता है लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं कि वह मरीज या परिजन  ने नाराज है। ऐसे में मरीज और उसके परिजन को डॉक्टर्स की भी मजबूरी समझनी चाहिए। यह कहना है  अपर मुख्य चिकित्साधिकारी रह चुके डॉ अजय का। डॉ अजय डॉक्टर्स डे एक दिन मुखातिब हुये। 


उन्होने कहा कि हम लोग तो हर दिन बेहतर कार्य करके डॉक्टर्स डे मनाते हैं। लेकिन एक जुलाई का दिन मरीज के लिए आ जाता है। उन्होने हर मरीज से अपील की है कि जिस भी डॉक्टर के इलाज से स्वास्थ्य हुये हैं। एक जुलाई को उसको धन्यवाद दें। गौरतलब है कि वर्तमान में जिले में 155 डॉक्टर अपनी अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। लेकिन उनमें डॉ. अजय कुछ हटकर कार्य करते रहते हैं। वह उन्हीं कार्यों के कारण पहचाने जाते हैं।


डॉ. अजय का संक्षिप्त इतिहास


डॉ. अजय आज अपने कार्यों  से  अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पद तक पहुंच चुके हैं  । इनके ऊपर  किसी भी प्रकार का कोई आरोप आज तक नहीं  लगा है। इनका जन्म चन्दौली जिले के गेरू गांव में सन् 23 अप्रैल 1965 को हुआ था। इनके पिता जूनियर इंजीनियर थे। इनकी शुरुआत  की शिक्षा डे नोबेल स्कूल धनबाद झारखण्ड में हुआ इण्टरमीडिएट की शिक्षा डीएवी कालेज जालंधर पंजाब, डॉक्टर  की पढ़ाई इन्होने राजेन्द्र मेडिकल साइन्स रांची झांरखण्ड में पूरा किया। उसके बाद इन्होने मुरादाबाद चिकित्सालय से 1994 में शुरुआत  किया। उसके बाद इनका तबादला वाराणसी जनपद में प्रभारी चिकित्साधिकारी के पद पर किया गया। ये वाराणसी जिले के रूदपुर में 5 वर्षों  तक कार्यरत रहे। फिर 2009 से अब तक ये मीरजापुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चुनार पर कार्यरत हैं  । इनके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चुनार पर तैनात रहते इनके अच्छे कार्यों  के कारण इनको प्रदेश स्तर पर 6 बार व जिलास्तर पर भी हमेशा पुरस्कृत किया जाता रहा है। आज ये अपर मुख्य चिकित्साधिकारी का भी पद मुख्यालय पर संभाले हुए। ये अपने केन्द्र सा0प्रा0स्वा0 केन्द्र को लगातार कायाल्प अवार्ड  में लगातार दर्ज करा रहे हैं । मार्च महीने से अब कोविड-19 के समय में ये अपने मन से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं  । कोविड-19 के मरीजों  का  समय ईलाज, दवा, ग्लस्ब व भोजन की बराबर उपलब्धता को बनाते हुए अपनी पैनी नजर रखे हुए एक बात की बात है। ये शाम के वक्त अपने घर के लिए निकले तभी इनको खबर लगी कि कोई गरीब परिवार में एक बच्चा अपनी मां के बीमार होने पर मदद की गुहार लगा है परन्तु गरीब होने से  गांव के लोग उसकी मदद को आगे नहीं  आ रहे हैं  तब इन्होने घर न जाकर उस बच्चे के घर नरायनपुर बाजार में गये और उस महिला व उसके दोनों  बच्चों को अपने गाड़ी में बैठाकर अपने साथ स्वास्थ्य केन्द्र पर लाने के साथ ही उसका तुरन्त इलाज शुरू किया और बच्चों को केन्द्र पर ही एक कमरे में रहने के साथ ही साथ खाने की भी पर्याप्त व्यवस्था किया। पीड़ित राधा बहुत चिंतित थी कि साथ में कोई नहीं है और पैसे भी नाममात्र है कैसे क्या होगा। पीड़ित महिला ने अपनी परेशानी डॉक्टर  को बताया तब डॉक्टर  ने कहा अब आपको चिन्ता करने की कोई बात नहीं  है जब तक आपका प्रसव नहीं  हो जायेगा आप मेरी ही देख रेख में रहेगी मैं  खुद यही रुका  रहूंगा जिससे आपको किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना नही करना पड़ेगा। उन्होने बच्चा पैदा कराने के साथ ही साथ उनको दवा केन्द्र से उपलब्ध कराया जिससे उस पीड़ित महिला को बाजार से दवा नही लेना पड़ा। 10 दिनों तक  केन्द्र पर रहने के बाद डॉ अजय डा0 अजय ने उसे अपनी गाड़ी से उसको घर तक पहुंचाने का कार्य किया और उसको घर जाते वक्त अपनी तरफ से 10 हजार रुपये  भी दिया। पीड़ित महिला को उसके पति से मोबाइल से वार्ता भी कराया जो बम्बई में रिक्शा चलाकर अपनी जीवकोपार्जन करने का कार्य करता था।


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