" मार कर संवेदनाये नर बना हैवान है "


विधा - गीतिका छन्द


✍️  रीना गोयल (सरस्वती नगर, हरियाणा)


प्राकृतिक संसाधनों से कर रहे खिलवाड़ हैं।
मानविक गुण है मिला लेते उसी की आड़ हैं।।


बेजुबानों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है कहो।
जीव से दुष्कर्म करते हो अहम में मत रहो।।


क्षणिक सुख के लोभ आकर काम ऐसा क्यों किया।
मूक, भूखी, गर्भिणी को विष भरा भोजन दिया।।


पेट में ज्वाला उठी हो बावरी वन-वन फिरी।
छल मनुष का सह न पायी डूब कर जल में मरी।।


मार कर संवेदनाये नर बना हैवान है।
भूलकर इंसानियत को हो गया शैतान है।।


है समय हे! नर संभल अब पाप का मत भर घड़ा।
कोप कुदरत का बढ़ेगा क्रोध जो रब को चढ़ा।।


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