खेतों से सोंधी-सोंधी सी महक उठने लगी है, एक ही रात में झूम के बरसा 45 एमएम पानी


जून के पहले हफ्ते में इतना पानी नहीं बरसता रहा


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : जून का प्रथम सप्ताह जहाँ किसानों के मुंह से 'वाह-वाह' का धन्यवाद पाता दिखा, वहीं सरकारी तंत्र के कान खड़े कर दिए। 15 जून से वर्षा के नाप-जोख की जगह 5 जून से ही वर्षा और गंगा का नाप-जोख शुरू हो गया।


4/5 की पूरी रात 45 MM कभी झूम के तो कभी रुक रुक बरसा पानी - जून के पहले ही हफ्ते की एक रात में संभवतः 45 वर्षों में 45 MM पानी बरसने का रिकार्ड नहीं मिल रहा है । जहां 4 जून की सुबह गंगा शीतल, मन्द, सुगन्ध बह रही थीं तो 5 जून की सुबह मटमैली होकर लहराते हुए बहने लगी । जलकुंभियों ने गंगा को आवरण में ढंक लिया है ।


गंगा का जल स्तर 64.000 मीटर हुआ - अचानक वर्षा से गंगा का जल स्तर 15 जून के बजाय 5 जून से नापा जाने लगा । मोटे तौर पर डेढ़ फीट गंगा उछल पड़ी हैं।


जून जैसे जनवरी की तरह हुआ - लगातार वर्षा से जहां जून में कूलर, AC की बहार रहती है, वहीं एक दिन में पासा ऐसा पलटा कि पंखा काटने-सा लगता दिखाई पड़ा। 


रोहिणी बरसे मृग तपे कुछ कुछ आर्द्रा जाए-घाघ कहे सुन घाघिनी श्वान भात नहीं खाय - लगभग 5 सौ वर्ष पहले बिहार के छपरा जिले के पं देवकली दुबे उर्फ़ 'घाघ कवि' अंतरिक्ष, नक्षत्रों के अच्छे ज्ञान की वजह से  मौसम वैज्ञानिक माने जाते रहे । उनका यह रिसर्च था कि रोहिणी नक्षत्र की वर्षा धान की खेती के लिए मुफीद होतो है । सो जाते जाते रोहिणी नक्षत्र में धमाकेदार वर्षा हो गई। 7 जून को प्रातः 6:24 से मृगशिरा नक्षत्र का आधिपत्य 22 जून को प्रातः 4:53 तक रहेगा। उसके बाद यह नक्षत्र अपना उत्तराधिकारी आर्द्रा नक्षत्र को बना देगा । इस प्रकार रोहिणी में वर्षा, मृगशिरा में तपन तथा कुछ दिन बीतने के बाद आर्द्रा में पुनः वर्षा होती है तो धान की पैदावार इतनी अच्छी होती है कि श्वान (कुत्तों) का भी पेट भर जाता है और वह भात (चावल) नहीं खाता।


बहराल मौसम आगे कौन सा करवट लेगा, यह कहा नहीं जा सकता लेकिन फिलहाल खेतों से सोंधी-सोंधी महक आने लगी है । ताल-तलैया भरे भरे से हो गए हैं।


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