इलाज के बकाया पैसों के लिये अस्पताल प्रशसन ने मृतक की पत्नी को बॉडी देने से किया इंकार


संसाद राहुल शेवाले के हस्तक्षेप के कारण मृतक की पत्नी को अस्पताल प्रशासन ने दिया बॉडी


मुंबई : एम पश्चिम मनपा वार्ड के सामने आने वाला चेंबूर का साई अस्पताल एक बार फिर से चर्चा बटोर रहा है। सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार से लेकर राज्य की उद्धव सरकार के उस आदेश की लॉक डाउन में धज्जियां उड़ा रहा है ।जिसमें साफ कहा गया है कि पैसो के लिये किसी गरीब की जान न जाये अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा देश की गरिब जनता को उपलब्ध करवाये अस्पताल प्रशासन। गौरतलब हो कि मुंबई के 95 प्रतिशत अस्पतालों के बेड भरे होने के कारण मजबूरन गरीब जनता को इलाज के लिये अपने निकटवर्ती को निजी अस्पतालों में ले जाने को विवश होना पड़ रहा है ।जब से राजा वाड़ी की घटना उजागर हुई है ,तब से मुंबई कर काफी सचेत हो चुके है ,वो सरकारी अस्पताल के भरोसे नहीं रहते।इसी समस्या को उजागर होते ही उद्धब सरकार ने निजी अस्पतालों को भी बेड रिज़र्व करने की सुविधा उपलब्ध करवाई है ।


इस बार मानखुर्द मंडाला की झोपड़ियो में रहने वाली गरीब महिला  साईदा बानो मंसूरी नामक महिला अपने बीमार पति को चेंबूर के साई अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती करवाया था।कुछ दिन इलाज करने के बावजूद मरीज इस्तियाक मंसूरी की अच्छे होने की बजाये मौत हो गई ।जिस पर अस्पताल प्रशासन ने महेंगे इलाज का बिल 4 लाख 90 हजार रुपये बनाया ।जिस पर कहा जाता है कि पीड़ित महिला ने 1लाख 5 हजार रुपए का बिल भर दिया ।बकाया रकम के लिये अस्पताल प्रशासन की और से दबाव बनाया जा रहा था,की जबतक बकाया बिल भरेंगे नहीं तो बॉडी नहीं दी जायेगी।


कहा जाता है कि पूर्व इस बात की शिकायत पीड़ित महिला साईदा बनो ने क्षेत्रीय सामजसेवको से लेकर पत्रकारों को बताकर मदद की मांग की। जिस पर मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकारों ने साई अस्पताल प्रशासन के डॉक्टर खालिद से बात किया मामले की पुष्टि करने हेतु ,मामले में लीपापोती वाला जवाब देते रहे ,खालिद डॉक्टर उन्होंने कहा कौन मना कर रहा है बॉडी देने के लिये आप डॉक्टर आबिद और सपना मैडम से बात कर कमल जाये बॉडी ।जबकि दूसरे छोर में अंगद की तरह पावँ जमाये साईदा बानो ने हिम्मत नहीं हारी ,ठान लिया था बस अब बहुत हो चुका, अब अपने पति की बॉडी लिये बगैर यहां से जाऊंगी नहीं ।उन्होंने दुबारा पत्रकारों को फोन कर के अस्पताल प्रशासन से बॉडी रिलिज करने के लिये दबाव बनाने के लिये मांग किया।पत्रकारों के दुबारा प्रयास से दक्षिण मध्य संसाद राहुल शेवाले से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया  परिणाम स्वरूप शेवाले के एक फ़ोन ने गरीब महिला को उसके पति की  देर रात अस्पताल प्रशासन बगैर पैसे लिये बॉडी देने को तैयार हो  गया।उपरोक्त मामले में  क्षेत्र की जनता में साई अस्पताल की छवि दिन ब दिन धूमिल कर दिया है ।कहा जाता है कि लॉक डाउन के मध्य में  उपरोक्त आस्पताल के डॉक्टर कोरोना संक्रमित होने का मामला उजागर होते ही मनपा ने इस अस्पताल को बंद कर दिया था। वहीं स्थानीय सामाज सेवक जमीर तंबोली के अनुसार कम या ज्यादा प्राइवेट नर्सिंग होंम में मरीज से ज्यादा पैसे को अहमियत दिया जाता है ।हर गरीब के साथ ऐसे अस्पताल वाले ऐसा रवैया अपनाते है ।


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