गुरु-भक्तिके सबसे बड़े केंद्र विंध्यधाम में इस बार मानसिक आस्था व्यक्त होगी


स्वामी अड़गड़ानन्द जी महराज ने लिया निर्णय, अन्य आश्रमों में भी जमावड़ा नहीं होने की संभावना


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : भारत के सबसे बड़े गुरु-आस्था के केन्द्र विंध्य क्षेत्र में इस वर्ष मानसिक आस्था और श्रद्धा व्यक्ति की जाएगी । इस क्षेत्र के दर्जनों गुरु-आश्रमों में तकरीबन 50-60लाख लोग आकर गुरु चरणों मे शीश नवाते रहे लेकिन अभागे कोरोना ने कुछ ऐसा रूप दिखा दिया कि ज्यादातर गुरु और सन्तों ने श्रद्धालुओं को सन्देश  दे दिया कि उनकी श्रद्धा इस बार मानस ही स्वीकार हो जाएगी। 


पहल की स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने - आश्रम के भक्त श्री रामप्रसाद पांडेय 'बाबा पांडेय' एवं श्री रघुवंश दीक्षित ने महराज के निर्णय की जानकारी दी । चूंकि विंध्यभूमि में सबसे बड़ा भक्तों का जमावड़ा हफ़्तों पहले से सक्तेशगढ़ में होने लगता था और महीनों पहले से वहां रंग-रोगन, बैरिकेटिंग, शामियाने आदि की तैयारी होती थी लिहाजा कोरोना के चलते सब प्रभावित हो गया है। इतना विशाल भंडारा संभवतः देश के किसी कोने में होता रहा हो । बीसों लाख लोग गुरु-दर्शन, प्रसाद और भंडारे में शामिल होते रहे हैं।


गुरुभक्ति का सबसे बड़ा धाम है विंध्यधाम -  सूर्य का रास्ता विन्ध्यपर्वत द्वारा रोकने की कथा आम रूप से प्रचलित है । वाल्मीकिरामायण के अनुसार काशी के दक्षिणी हिस्से के पर्वत पर गुरु अगस्त्य साधनारत थे । देवताओं के अनुरोध पर वे जब विन्ध्यपर्वत पर आए तो उनका आदेश मानकर विंध्यपर्वत जो झुका तो आज तक झुका है। झुकने से बड़पप्पन मिलता है, इस मान्यता को बल देने के लिए त्रिकोण की देवियां यहीं आईं।


DM और SP ने इस पर मंथन किया था - दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिरों को खोलने के निर्धारित तिथि 8 जून को गुरु-पूर्णिमा पर्व पर मंथन किया था ।क्योंकि अड़गड़ानन्द महराज के आश्रम के अलावा देवरहा बाबा, भैरोकुंड में स्वामी प्रबुद्धनन्द, जगतानन्द आश्रम, बरैनी, हाईमाई आश्रम (अघवार), गुदरिया महराज आश्रम (आमघाट), डगमगपुर (कोटवा) में बालनाथ आश्रम, गायत्री परिवार, लोहन्दी में खुटहा महाबीर आश्रम एवं कलवारी में गीता आश्रम सहित दर्जनों आश्रमों में गुरुभक्तों का जमावड़ा होता रहा है । दोनों अधिकारी इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के हल के प्रयास में उसी दिन से लगे थे । अब जबकि स्वामी अड़गड़ानन्द जी ने भक्तों को घर से ही आस्था प्रकट करने का संदेश दे दिया है तो संभव है अन्य आश्रम भी इस बार भीड़भाड़ एवं जमावड़े से परहेज करेंगे।


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