एक सकारात्मक सोच : कब तक डरोगे !


पानी में रहना है तो मगरमच्छ से कब तक डरोगे, ज़मीन पर रहना है तो कब तक करोंना से डरोगे ?


✍️  हार्दिक हुँड़िया


विश्व आज कोरोंना नाम के रोग से भयंकर भयभीत है ? हमारी भारतभूमि भूमि भी। हमारे जीवन के इतिहास में हमने ऐसी बर्बादी का तांडव कभी नहीं देखा था जो कोरोंना ने मचा रखा है ? हमारे बॉर्डर के नवजवान हमारी रक्षा के लिये ऐसे खड़े है, जान जाये तो जाये लेकिन देश को आँच भी नहीं आनी चाहिए ऐसी अनमोल सोच वाला हमारा देश एक कोरोंना के सामने डर गया है ? क्या इस का जिम्मेदार मीडिया है ? कई लोगों ने न्यूज़ देखना बंद कर दिया, क्यूँकि कोई भी न्यूज़ चेनल चालू करो तो अपटूडेट कपड़े में कोरोंना की न्यूज़ ऐसे बतायेंगे उनको तो कुछ हुया नहीं लेकिन हम पे कोई आसमान गिरने वाला हो ? हमारे वो पत्रकारों को धन्यवाद  है जो रात दिन कोरोंना की ख़बर लिये दौड़े है, कोरोंना भी हुया, ठीक भी हो गये और वापस समाचार के लिये दौड़े, ऐसी हिम्मत की न्यूज़ दिखा कर देश का होशला बढ़ाने का काम करना चाहिये ?


अच्छा है जहाँ अबोल जीवों रहते है वहाँ मीडिया नहीं है वरना मगरमछ के नाम पे सभी जीवों के ऐसे डरा देते की उनका जीना हराम हो जोता ...? मगरमछ भी शिकार तब करता है जब उन्हें भूख लगती है, पानी में रहने वाले जीवों को भी उसका ख़ौफ़ पता है ? लेकिन वो अपनी जगह बनाकर सेफ़ हो जाते है । उशी तरह हमें कोरोंना का ख़ौफ़ पता है ? लेकिन डर कर कब तक जियेंगे ?


हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने अपने हर संदेश में हमें सावधान किया है , उन्होंने कभी डराया नहीं ये बात देश की मीडिया को भी पता है।


विश्व में सब से ज़्यादा धर्म में समजने वाले भारत की जनता है । लेकिन कभी कभी हम ख़ुद ही हमारे सलाहकार बन जाते है ? अंगरेजोके राज में भी भगवान के दरवाज़े बंद नहीं हुये थे वो हम ने जो इतिहास देखा उस में पहली बार बंद हुये है । आज देश में भयंकर डर के महोल में कब तक जियेंगे ? एक नगर में एक भी कोरोंना का केस नहीं था और अचानक एक कैसे आया तो मीडिया ऐसे न्यूज़ बताएगी जैसे कोई बड़ी लोटरी उनको लग गई हो ? अरे भाई सावधान करना अलग बात है ? हे मीडिया आपने कभी सोचा की जिनके परिवार के सदशय को कोरोंना पॉज़िटिव आया उनके पर क्या बीती होगी ? कभी ख़ुद के पर ले के देखो ? आज ये इतना ख़तरनाक रोग आया है की भाई भाई के घर जाते हुये डरने लगा ? बेटी के पिताजी गाँव आये थे कोरोंना चक्कर में गाँव में फश गये, बेटी ने बाप को मना कर दिया, आप मेरे घर मत आइये ? क्या बीती होगी वो पिता और बेटी पे कभी सोचना ?


हमारे धर्म गुरु ? क्या कहना उनका ?


मैं जैन हु तो थोड़ी बात यहाँ चेंज करता हु । कोरोंना की महामारी की बीच कई धार्मिक कार्यों को उन संतो ने बंद करा दिये जो ख़ुद कराने की बात करते थे ? बिना सोचे समजे पहले राष्ट्र प्रेम बाद में धर्म ? इन को हार्दिक हुँड़िया का सवाल है की कौनसे धर्म ने राष्ट्रप्रेम नहीं सीखाया ? देश बचेगा तो धर्म बचेगा और धर्म बचेगा तो देश बचेगा । धर्म में जो भी कार्य होता है उसमें देश भावना हमेशा होती है ।


आज धर्म दिखावा हो गया इस लिए धर्म करने के दरवाज़े बंद हो गये ?


एक जैन संत ने एक भक्त को बुलाकर कुछ मंत्र का जाप अपने एरिया की शांति के लिये करे ऐसा प्रस्ताव रखा ? तो भक्त बड़ा होशियार था बोला साब एक काम करते है पूरे नगर की शांति के लिये कर दो ? संत और भक्त दोनो को मजा आ गया, उन्होंने नगर छोड़, ज़िल्ला छोड़ , राज को छोड़ पूरे देश की ज़ूम मीटिंग कर दी और उनमें उनकी हाजी हाँ करने वाले को जोड़े ताकि वो जो बोले वो ही हो,ज़िंदगी में जाप क्या है जिनको पता नहीं था वो लोग जाप की कमिटी में आ गये ?


सब को लगा अरे इस में तो पब्लिसिटी ज़ोरदार मिलेगी, एक काम करो इन जाप को विश्वशांति जाप का नाम दे दो । धर्म के नाम पे धंधा शुरू ? सभी संतो ने अपनी अपनी दुकान खोल दी, जाप के नाम पे जाप तो एक तरफ़ ख़ुद की पब्लिसिटी ? अरे सच्चे दिल से धर्म की आराधना की होती तो परम कृपालु परमात्मा के दरवाज़े बंद ना होते ? कुछ संत सलाह देते है की हम बचेंगे तो धर्म तो हो जायेगा लेकिन जान ही नहीं होगी तो क्या करेंगे ?


मूँझे ऐसी सलाह देने वाले लोगो से सवाल है की फिर क्यू कहते हो की जो करना है आज करलो कल किसने देखा ? आप एक ट्रेक पर आप अपनी रोल्ज़रोय गाड़ी में जा रहे हो, सिर्फ़ ८० की स्पीड है, दो ड्राइवर आगे बैठे है , आराम से गाड़ी चल रही और आपको अंदर बैठे राजा महाराजा जैसी फ़ीलिंग आ रही है, और अचानक सामने वाले ट्रेक से एक ट्रक ड्राइवर अपना बेल्लेनस खो देता है और आपकी रोल्ज़रोय को टक्कर मार देता है तो आप क्या करोगे ? यहाँ हम कहते है की हमारे कर्मों का फल है । एक दम गाड़ी सेफ़ थी, स्पीड लिमिट थी, ड्राइवर अनुभवी था, राइट ट्रेक था फिर भी अकस्मात् ? कोई सोच भी नहीं सकता की ऐसा भी होगा ?


कोरोंना वो रोग है वो कब किसीको आ जाये पता नहीं ? हमें सावधान रहना है ? कब तक घर बैठोगे ? ये डर अब निकाल दो कोरोंना आ गया तो ? इतना समझते हो तो इतना और भी समज लो की ना आये ऐसा कुछ करे ? फिर भी आ जाये तो समजना की हमारे पाप कर्मों का फल है, थोड़े भी अछे करम किये होंगे तो बच जाएँगे, और अभी से एक काम करना है की हे प्रभु मेरे से किसी का ख़राब ना हो और सब का भला हो ऐसे ही अनमोल कार्य करता रहु जिसमें सब का भला हो।


यह सकारात्मक लेख उन सकारात्मक भाईओ को समर्पित है जिनकी सोच देश भक्ति और राष्ट्रप्रेम में मशगूल हो 


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