दिल्ली परिवहन विभाग (डीटीसी) राजघाट डिपो-2 के स्थाई-चालक कोविड-19 से संक्रमित होने पर हुई मौत


रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया


दिल्ली : वैश्विक-महामारी के चलते दिल्ली के अंदर तेजी से पैर पसार रहे भयंकर कोरोना वायरस के कारण दिल्ली में आए दिन हजारों की संख्या में लोगों की बढ़ती तादाद और सरकार की विफल स्वास्थ्य उपलब्धियों के चलते आए दिन लोगों की मौत होना निरंतर जारी है। इसी के चलते दिल्ली परिवहन विभाग डीटीसी स्थाई-चालक लाल सिंह राजघाट डिपो-2 बैच नंबर-20581 कोविड-19 का शिकार होने से मौत हो गई। इससे पहले भी दो अन्य कर्मचारियो की कोरोना से मौत हो चुकी है। लेकिन परिवहन-निगम डिपो के डीओ द्वारा रजिस्ट्र मे मौत के असली कारण को रिमार्क करके मौत की असली वजह को छुपाने हेतु रिमूव कर दिया गया है, ताकि मौत होने का अन्य कारण बताया जा सके। लेकिन (डीटीसी) कर्मचारी एकता यूनियन के महामंत्री ललित चौधरी और कार्यकारिणी अध्यक्ष मनोज शर्मा ने मीडिया समक्ष बताते हुए कहा लाॅकडाउन महामारी दौरान से मृतक चालक लगातार एक कोरोना-योद्धा की तरह अपनी ड्यूटी को निभाते आ रहे थे। कार्यकारिणी अध्यक्ष मनोज शर्मा अनुसार दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा महामारी के दौरान सेवा पर तैनात-योद्धाओं की मौत पर उनके परिवार को एक करोड़ की सम्मान-राशि देने की बात कही थी। लेकिन अब इसके उल्ट ऐसी क्या वजह है की विभाग मौत के असली कारणों की वजह को छुपाने की जद्दोजहद में लगा है। इससे पहले हुई कर्मचारियों की मौत पर सरकार द्वारा अभी तक एक भी रुपया नहीं दिया गया। मृतक चालक के बेटे ने कोरोना पॉजिटिव-रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, समझ नहीं आ रहा इस तरह कैसे विभाग मेरे पिता की मौत की असली वजह को झूठला सकता है। जबकि मेरे पास इसके पुख्ता सबूत हैं। आखिर दिल्ली सरकार की अपने कर्मचारियों की मौत के प्रति क्या इस तरह की संवेदनशीलता है ? सम्मान देना तो दूर, मौत के असली कारणों को छुपाने के पीछे आखिर दिल्ली सरकार की मंशा क्या है? यह सब को नजर आ रहा है (डीटीसी) कर्मचारियों ने भारी रोष-व्यक्त करते हुए दिल्ली सरकार के आगे अपने साथी कोरोना-योद्धा चालक की मौत पर एक करोड की सम्मान-राशि देने की मांग को दोहराया।


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