ऐ भाय, जरा सम्हल के रहें !


15 जून से मिथुन संक्रांति होगी : शुभता में कमी के संकेत


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : कोरोना के चलते उथल-पुथल भरे माहौल में 15 जून से हो रहे राशि-परिवर्तन के संकेत अच्छे नहीं दिख रहे हैं। लिहाजा ज्योतिषीय-वर्ग बच कर, सम्हलकर और आचरण को सुधार कर रहने की सलाह दे रहे हैं।


हर माह संक्रांति होती है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश करते हैं तब एक राशि का छोड़ना और दूसरे में प्रवेश के काल को संक्रांति का काल माना जाता है। 15 जून को प्रातः 6:38 पर सूर्य का पदार्पण मिथुन राशि में होगा जहां राहु और बुध विराजमान हैं। राहु का उच्च में होना अनिष्ट का सूचक है। राहु उच्च में हैं लिहाजा सौम्य ग्रह बुध चाहकर भी भला करने की स्थिति में नहीं है।


इसी बीच मिथुन में सूर्य के रहते आषाढ़ अमावस्या, 21 जून को सूर्यग्रहण लग रहा है । यद्यपि यह खण्डग्रास सुर्यग्रहण होगा लेकिन ग्रहों की विपरीतता से असर घातक ही होगा।


इस अवधि में वर्तमान कोरोना महामारी से सजग रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान के क्रम में समुचित आहार-विहार के साथ सूर्योदय कम से कम एक घण्टे पहले जागकर प्राणायाम लाभप्रद होगा।


दुर्गा, विष्णु और शिव के मंत्र का जप तब फलदायी होगा जब आचरण भी दैवीय प्रवृति का हो।


इस अवधि में विश्व के धरातल पर पड़ोसी राष्ट्रों के बीच तनातनी की स्थितियां होंगी तो निजी जीवन में पड़ोसियों और आसपास रहने-मंडराने वालों से तनाव बढ़ेगा लिहाजा जो व्यक्ति नकारात्मकता, ईर्ष्या-द्वेष, निन्दापुराण, छल-छद्म जैसी रावणी-प्रवृत्ति में रुचि ज्यादा लेता हो, उससे दूरी बनानी चाहिए। धर्मग्रन्थों में ऐसे लोगों के सामने पड़ने से बचने की सलाह दी गई है।


18 जून से मंगल ग्रह के परिवर्तन का भी अच्छा प्रभाव नहीं बताया जा रहा है। 18 जून से वर्षा की अधिकता के संकेत हैं। सूर्य के 16 जुलाई को कर्क में प्रवेश करने पर अनुकूलताएं आएंगी।


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