अधिवक्ता का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार स्वीकार्य नहीं : हाईकोर्ट 


रिपोर्ट : एडवोकेट विनीत दूबे


प्रयागराज, (उ0प्र0) : उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित आश्रय गृहों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए अधिवक्ता फारुख खान ने 22 जून 2020 को एक पत्र लिखा, जिसका हवाला देते हुए राजहंस बंसल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर दी। याची के अधिवक्ता श्वेताश्व अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि कानपुर के आश्रय गृहों  की स्थिति के संबंध में अधिवक्ता फारूख खान के द्वारा एक नियमित याचिका दाखिल की जाएगी। उनके द्वारा लिखित पत्र से संदर्भ ग्रहण करके राजहंस बंसल ने यह याचिका दाखिल की है। दरअसल अधिवक्ता फारुख ने वह पत्र जल्दबाजी में केवल प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की रिपोर्ट के आधार पर लिख दिया था, उन्होंने संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों की जांच स्वयं नहीं की थी। अधिवक्ता श्वेताश्व अग्रवाल का पक्ष सुनकर न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल व एसडी सिंह की खंडपीठ ने फटकार लगाते हुए कहा कि एक अधिवक्ता का ऐसा गैर- जिम्मेदाराना व्यवहार निंदनीय है और इसे किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं किया जा सकता है, अतः इस याचिका को निराधार मानते हुए खारिज किया जाता है।


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