अधीनस्थ अदालतों में मुकदमे की सुनवाई हेतु नई गाइडलाइन जारी


रिपोर्ट : एडवोकेट विनीत दूबे


प्रयागराज, (उ0प्र0) : इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव ने अधीनस्थ अदालतों एवं पीठासीन अधिकारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। महानिबंधक द्वारा जारी यह गाइडलाइन 8 जून से लागू होगी। नई गाइडलाइन के तहत अधीनस्थ अदालतों एवं ट्रिब्यूनल में न्यायिक तथा प्रशासनिक कार्य सामान्य रूप से संचालित किए जाएंगे। सभी न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह हिदायत दी गई है कि अदालती कार्यवाही समाप्त होते ही वह न्यायालय परिसर को छोड़ दें। प्रत्येक जिले की चिन्हित एक या दो अदालतों में न्यायिक कार्य जिट्सी सॉफ्टवेयर के माध्यम से संचालित होंगे। इसके साथ ही वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रिमांड के मामले निस्तारित किए जाएंगे।


जिला अदालतों में कंप्यूटर विभाग द्वारा सभी अधिवक्ताओं को ई-कोर्ट ऐप के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला न्यायाधीश, जिलाधिकारी, सीएमओ, सीएमएस व स्वास्थ्य कर्मचारियों की मदद से अदालत खोलने से पहले परिसर का सैनिटाइजेशन कराया जाएग। इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार कोर्ट परिसर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी और तबीयत खराब होने पर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। केंद्र सरकार, राज्य सरकार व हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार सोशल-डिस्टेंसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए प्रत्येक अदालत में चार ही कुर्सियां रखी जाएंगी। अदालत में केवल उन्हीं अधिवक्ताओं और वादकारियों को प्रवेश की अनुमति होगी, जिनके मुकदमे की सुनवाई होनी है।


न्यायिक कार्यवाही समाप्त होते ही उन्हें परिसर को छोड़ने का आदेश दिया गया है। पीठासीन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अदालत में वादकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की भीड़ एकत्रित ना होने दें। हाईकोर्ट के 2 मई 2020 को पारित दिशा- निर्देशानुसार यदि कोई जिला न्यायालय परिसर प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है, तो वह परिसर बंद ही रहेग। न्यायिक प्रक्रिया एवं व्यवस्था के बारे में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वॉलिंटियर्स की भी मदद ली जाएगी। जिला न्यायाधीशों के द्वारा न्यूनतम कर्मचारियों को ही बुलाना सुनिश्चित किया गया है। कोर्ट में बहस के लिए उपस्थित होने वाले वकीलों का ड्रेस कोड भी जारी किया गया है। सफेद शर्ट, पैंट और बैंड पुरुष अधिवक्ता के लिए तथा महिला वकीलों के लिए पहले से तय ड्रेस कोड ही निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही वकील व न्यायिक अधिकारी कोट व गाउन पहनकर नहीं आएंगे। सभी अधिवक्ताओं द्वारा ईमेल के माध्यम से जमानत या अग्रिम जमानत की अर्जी, अत्यावश्यक मामले की अर्जी और लिखित बहस की प्रति प्राप्त की जाएगी। केंद्र व राज्य सरकारों के सभी निर्देशों का अनुपालन होगा।


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