आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र की अष्टमी तिथि मंगलमय हो


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


नवरात्र की अंतिम तीन तिथियां अत्यंत फलदायी बताई गई हैं। पूरे नवरात्र में यदि आराधना, व्रत, जप नहीं हो सका तो इन तिथियों में जरूर कर लेना चाहिए।


सप्तमी तिथि - ज्ञानेंद्रियों के सप्त प्रवेश द्वार की शुचिता ताकि मन, मनन करते मनस्वी हो जाए।


अष्टमी तिथि (जो 28 जून को है)- दैहिक, दैविक और तापों से निजात पाने के लिए 24 घण्टे के एक दिवस को तीन भागों में बांटना चाहिए। यानि ब्रह्ममुहूर्त 4 बजे से मध्याह्न 12 बजे तक शरीर को स्वस्थ, हृष्टपुष्ट बनाने के लिए प्रयास, मध्याह्न 12 बजे से रात्रि 8 बजे हर कार्य एवं उद्यम में सकारात्मकता का देवत्व जागृत करना चाहिए और रात्रि बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक भौतिक संसार से जुड़ना चाहिए।


त्रिकोणीय जीवन - विंध्यक्षेत्र के त्रिकोणीय देवियां- कालीखोह की मां महाकाली रक्तपान के चलते ब्लड बैंक हैं तो अष्टभुजा की माँ महासरस्वती नालेज बैंक और महालक्ष्मी स्वरूपा मां विंध्यवासिनी मनीबैंक (रिजर्व बैंक) हैं।


अष्टमी की साधना महाष्टमी की साधना के पीछे ऋषियों की दृष्टि काल के अष्टक स्वरूप की आराधना की झलकती है।


नवमी तिथि - गर्भ में 9 माह रहकर मां के रक्त से जीवन पाने के चलते कृतज्ञता प्रकट करने की तिथि इसे मानकर हर माह की नवमी तिथियों में जन्मदात्री मां की विशेष सेवा करनी चाहिए।


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