यूपी : लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं - हाई कोर्ट


रिपोर्ट : एडवोकेट विनीत दुबे


प्रयागराज, (उ0प्र0) : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अजान देते समय लाउडस्पीकर का प्रयोग दूसरे के अधिकारों का उल्लंघन है। गाजीपुर से बसपा के सांसद अफजाल अंसारी ने लॉकडाउन के दौरान जिलाधिकारी द्वारा अजान पर लगाई गई रोक के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। गाजीपुर के साथ ही हाथरस और फर्रुखाबाद की मस्जिदों में अजान पर लगी रोक को हटाने के लिए भी याचिका दाखिल की गई थी। न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने अफजाल अंसारी व फर्रुखाबाद के सैयद मोहम्मद फैजल की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए इस मामले में 5 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसके अनुसार लाउडस्पीकर से अजान देना इस्लाम का हिस्सा नहीं है।


शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अजान देने में लाउडस्पीकर का प्रयोग इस्लाम का धार्मिक भाग नहीं है। अतः स्पीकर से अजान देने पर रोक सही है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब स्पीकर नहीं था, तब भी अजान होती थी। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि स्पीकर से अजान रोकना अनुच्छेद 25 में वर्णित धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। इसी क्रम में कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार सभी को है। लाउडस्पीकर द्वारा अजान देने पर वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है।


किसी भी धर्म से जुड़ी मान्यताओं या उद्देश्यों को जबरदस्ती दूसरे व्यक्ति को नहीं सुनाया जा सकता। ऐसा करना अमुक व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसके साथ ही बिना अनुमति एक निश्चित ध्वनि से अधिक तेज आवाज में किसी यंत्र का प्रयोग नहीं किया जा सकता, साथ ही रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक उच्च ध्वनि यंत्रों के प्रयोग पर रोक भी है। न्यायालय का कहना है कि मानव आवाज में मस्जिदों से अजान दी जा सकती है। ध्वनि-प्रदूषण मुक्त नींद का अधिकार जीवन के मूल अधिकारों का हिस्सा है। किसी को भी अपने मूल अधिकारों के लिए दूसरे के मूल अधिकारों का उल्लंघन करने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को सभी जिलाधिकारियों से इस आदेश का अनुपालन कराने का निर्देश दिया है।


Comments