थाना प्रभारी ज्ञानेंद्र राणा व पुलिस  स्टाफ ने संयोजित-तरीके से दृष्टिबाधित-परिवार को राशन मुहैया करवा सुगमता-कार्यशैली को दिया बखूबी अंजाम


रिपोर्ट : अनीता गुलेरिया


दिल्ली : जिला द्वारका छावला लॉकडाउन के दौरान जिला द्वारका छावला थाना-प्रभारी  ज्ञानेंद्र राणा की अगुवाई में  पुलिस स्टाफ गरीब-मजदूर, बेसहारा दिव्यांग-लोगों को भोजन के इलावा जरूरी सुविधाओं को तत्परता से मुहैया करवाकर निरंतर सुगमता-कार्यशैली को अंजाम दे रहा है,ऐसे मे खैरा गांव के एक बेरोजगार हरिलाल उसकी बीवी दोनों दृष्टिबाधित है व उनके दो छोटे बच्चे हैं,सिपाही अशोक कुमार व जितेंद्र एसएचओ की मदद से सूखे राशन का प्रबंधन करके रिक्शा उपलब्ध करवाते हुए दृष्टिबाधित के घर राशन पहुंचाकर एक मानवता की  मिसाल को पेश कर (दिल्ली पुलिस, दिल की पुलिस) नाम को पूरी तरह से सार्थक करते नजर आए।


एसएचओ ज्ञानेंद्र राणा अनुसार लॉक डाउन के शुरुआती दौर में सिपाही अशोक व जितेंद्र को पता चला एक दृष्टिबाधित परिवार जो दिखाई ना देने के कारण बाहर से खाना ला पाने में असमर्थ है,तब मुझे लगा सामान्य लोगों के इलावा इन दिव्यांगजनों को मदद की पहले अत्यंत आवश्यकता है,हमने संयोजित तरीके से राशन,दूध व जरूरी सामान खरीद कर उनके घर तक पहुंचाया,मुझे अपने समस्त स्टाफ  और इन दोनों सिपाहियों पर नाज है,इनके उचित सहयोग व सुगम प्रयास से अपने फर्ज को सकारात्मक तरीके से सही से निभाने मे कामयाब हो पाए । बता दें लॉकडाउन दौरान छावला स्टाफ पुलिसकर्मी अपने हाथों से दिन-रात खाना बनाकर गरीब, असहाय,लोगों को भोजन वितरित करते रहे हैं,और अपने इलाके में किसी भी गरीब मजदूर को भूखे पेट नहीं सोने दिया जो अति सराहनीय है । सुगमता-शैली के झूठे नारे देने वाली हमारी सरकारें,क्या दिल्ली पुलिस द्वारा निरंतर जारी सुगमता-कार्यशैली की जिंदादिली-तस्वीरों को कभी अपनी जीवन-शैली में उतार पाएंगी ?


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