'निराला-रचनावली' के संपादक एवं प्रगतिशील समीक्षक नन्द किशोर नवल नही रहे


साहित्य जगत ने कहा- समीक्षा के न्यायाधीश थे


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर (उ0प्र0) : बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में बहैसियत कवि, सम्पादक एवं लेखक के रूप में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपने त्रिपदी-नाम की वजह से जहां हिंदी साहित्य को त्रिपदी गायत्रीमंत्र से सशक्त और ऊर्जावान किया वहीं पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नन्द किशोर नवलने भी अपने त्रिपदी-स्वरूप से सदी के उत्तरार्ध से लेकर अबतक अपने व्यापक लेखन द्वारा हिंदी साहित्य के विशाल फलक को प्रकाशमान किया । निराला की कविताओं और विभिन्न विधाओं की कृतियों का निराला-रचनावली के आठ खंडों में संयोजन के लिए उन्हें प्रणेता  समालोचकों के प्रगतिशील  पंक्ति पावन मे समादृत किया जाएगा । यद्यपि वे सोच और कर्म दोनों मोर्चो पर  परंपरित पंक्ति- भेद के हिमायती नहीं थे। उनकी दिनकर-रचनावली भी अद्भुत प्रस्तुति है ।


इन विचारों के साथ गुरुवार को नगर के तिवराने टोला स्थित डॉ भवदेव पांडेय शोध संस्थान में लेखक तथा समालोचक नन्द किशोर नवल के निधन पर साहित्यजगत द्वारा शोक प्रकट किया गया। 


हिंदी ग़ज़लकार तथा जयशंकर 'प्रसाद' पर ग्रन्थ लिखने जैसा अति महत्वपूर्ण एवं गुरुतर दायित्व संवरण और निर्वहन करने वाले  दैनिक जागरण, वाराणसी के सम्पादकीय विभाग में पूर्वांचल प्रभारी श्री श्याम बिहारी 'श्यामल' के सन्देश से बुधवार को डॉ नवल के निधन की खबर मिलते ही संस्थान को लगा कि समालोचक रामविलास शर्मा ने 'निराला की साहित्य साधना' में जहाँ निराला के जीवन, उनके रचनात्मक संघर्ष और उनकी रचनाओं को मिलाकर शब्दांकन में  निराला की जो अद्वितीय आदमकद प्रतिमा गढी ,वहीं दूसरी ओर डॉ नन्द किशोर नवल ने निराला की कविताओं, रचनाओं, कहानियों, लेखों  और विचारों आदि का गहन अन्वेषण कर निराला साहित्य का विस्तृत सृजनात्मक वितान खड़ा किया।नवल जी का रचनावली कर्म रचनावली परंपरा का गतानुगतिक पृष्ठ पेषण नहीं है, बल्कि इसका पैटर्न और प्रारूप नियोजन सहितेन भावेन की साहित्य- चेतना को निरंतर आगे ले जाने का बृहत्तर अनुष्ठान है। इसी कड़ी में हिंदी गौरव से सम्मानित डॉ भवदेव पांडेय ने मिर्जापुर के निवासी बाबू महादेव प्रसाद सेठ द्वारा प्रकाशित 'मतवाला' के  सम्पादक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला से जुड़े उन तथ्यों को जो अछूता रह गए थे, उन्हें  'एवं निराला' समीक्षा पुस्तक में प्रकाशित किया । डॉ पांडेय ने उक्त पुस्तक और निराला से संबंधित विभिन्न समकालीन पत्र - पत्रिकाओं मे प्रकाशित अपने चर्चित लेखों में डॉ नवल की रचनावलियों से उद्धरण भी दिया और उनका उल्लेख भी किया।


नन्द किशोर नवल को हिंदी साहित्य की समीक्षा जगत का न्यायाधीश कहा गया । कबीर की छाप उनके लेखन में 'जो घर फूंको आपनो चलो हमारे साथ' के रूप में दिखती है । मार्क्सवादी आलोचना और वामपंथी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में व्यापक सांस्कृतिक एवं जनवादी सरोकार शामिल हैं ।


इस अवसर पर संस्थान के संयोजक सलिल पांडेय, योगेन्द्रनाथ मिश्र, कृष्णकुमार, राजेश सिंह एवं शेखर आदि उपस्थित थे ।


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