मनरेगा बनी गरीबों के रोजगार का सबसे बड़ा साधन, लॉकडाउन के दौरान गांव में ही काम पाकर खुश हुए मजदूर

- मजदूर ने कहा अगर काम मिलता रहा तो दूसरे प्रदेश जाने की जरूरत नही

- सरकार पर काश्तकार मस्त कहा की अब हम खेत में उगा सकते हैं अनाज

- प्रदेश सरकार सभी प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने का काम कर करना स्टार्ट कर दी है

 


रिपोर्ट : बृजेश गोंड


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : मनरेगा योजना प्रवासी मजदूरों को दिए जाने वाले रोजगार का सबसे बड़ा साधन बन गयी है। आज प्रदेश सरकार सभी प्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने का काम कर रही है। इसी क्रम में जनपद के  विकासखण्ड सिटी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत अहमलपुर में 15 दिन से 400 मजदूरो को   मनरेगा के तहत नाली, खड़ंजा, इंटर लाकिंग, समतलीकरण जैसे काम मुहैया कराया जा रहा है, जिससे मजदूर काफी खुश हैं। क्योंकि लॉकडाउन के चलते उनका कामधंधा पूरी तरह से बंद हो गया था।


- गांव में ही मिला रोजगार


यहां काम कर रहे मजदूर मोहनलाल बहुत खुशी मिजाज मे बताया की हम लोग इससे पहले अलग-अलग राज्यो मे जाकर काम करते थे जिससे घर का खर्च चल रहा था। अब गाँव मे ही काम मिल रहा है तो हम लोग कर रहे है। कोरोना जैसी महामारी मे  सरकार ने मजदूरो को जो मनरेगा के तहत काम दिया हम उसके लिये धन्यवाद देते है। वही अब सरकार ग्राम प्रधान जगत प्रकाश देव के द्वारा संथली करण के खुदाई के काम में लगा दिया जिसका मेहनताना दो सौ दो रुपया है।



यहां के स्थानीय ग्राम प्रधान जगत प्रकाश देव ने बताया कि कोरोना की महामारी मे मजदूरो मे सोशल डिस्टेंसन को देखते हुये कार्य किया जा रहा है!इस लॉक डाउन में बाहर से आये मजदूर व ग्रामीण  गांव में ही  काम कर रहे हैं और सरकार के आदेश पर सभी मजदूरो को मरेगा के तहत काम दिया गया है।

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