क्या हमारे आपके दिल मे मां के लिए सिर्फ एक ही दिन बचा है प्यार जताने के लिए !


एक दिवस में माँ का कर्जा लोग चुकाएँगे जैसे, हो हल्ला करके क्या अपना फर्ज निभाएँगे ऐसे।


माँ तो माँ है कौन जगत् में माँ सा अनुपम और कहो, बाक़ी   रहे दिनों में माँ को कहो छु पाएँगे कैसे।।


रिपोर्ट : नित्यानन्द पाण्डेय मधुर


मातृ दिवस के एक दिन पहले से ही फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, मैसेन्जर, इंस्टाग्राम, लाईकी, आरकुट आदि पर  मातृदिवस मातृदिवस ये कैसा शोर है।


क्या हमारे आपके दिल मे मां के लिए सिर्फ एक ही दिन बचा है प्यार जताने के लिए? वो भी सिर्फ फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर हंगामा करने के लिए। मुझे आजतक ये समझ में नहीं आया कि दिखावा करने की क्या आवश्कता है?


हमारे पुराने मित्र अक्सर बोलते है कि दादाश्री आप ऑनलाइन क्यो नही आते है? फेसबुक पर कुछ आप भी बोलिए, पर अपने हृदय की व्यथा को कैसे कहूँ कि मैं लाइव क्यों नहीं आता? मेरा लाइव आना और कुछ कहना मतलब बहुतों को बुरा लगना। क्योंकि मैं दो चेहरे के साथ नही जी सकता। जब भी मुँह खोलूँगा आज के समय का कड़वा सत्य ही बोलूँगा। किसी को बुरा लगता है, तो लगे। लोगों की झूठी खुशी के लिये सत्य का गला नही घोट सकता हूँ। किसी के दिल को ठेस पहुचाने के लिये नही लिख रहा हूँ, फिर भी मेरा लेख यदि किसी के जीवन से मिलता-जुलता हो, और उसे बुरा लगे तो क्षमा प्रार्थी हूँ।


कड़वा है, पर यह वर्तमान समय का सत्य है। मैं ये नही कहता कि सभी लोग ऐसे है, पर कुछ लोग ऐसे है। जिन्हें आज अपने बुजुर्ग बोझ लगते हैं। बचपन में जिन माता-पिता के बगैर नींद नही आती, वही माँ-बाप बुजुर्ग होने पर खटकने लगते हैं। और वो बच्चे अपनी जिम्मेदारी भूलकर उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं तिल-तिल मरने के लिए। यूँ ही नही बढ़ व फल-फूल रहा है भारत में वृद्धाश्रम।


क्या कभी आप ने सोचा है कि आपके वृद्ध माता-पिता आप से क्या चाहते है ? नही, आपके पास समय ही कहाँ है ये सोचने का, कि आपके वृद्ध माता- पिता आप से क्या चाहते है। आप तो सुबह उठे अपने नित्यकर्मो से निवृत्त हो के अपना बैग उठाये और चल दिए ऑफिस। फिर ऑफिस से आये और अपने शयनकक्ष घुस गये। छुट्टी के दिन चित्रपट देंखने, शापिंग मॉल या कहीं पिकनिक पर पत्नी व बच्चों के साथ निकल जाते हैं, या दोस्तो के साथ मौज-मस्ती में समय बिता देते हैं। अन्य और भी कई विकल्प है आप के पास मनोरंजन के लिए। परन्तु माता-पिता के लिये आपके पास समय नही है।


वृद्ध माता-पिता आपसे आपका वेतन या आपकी जमा पूँजी नही चाहते बल्कि वो अपनी जमा पूँजी अर्थात आपको वो हमेशा स्वस्थ और खुश देखना चाहते है सदैव उन्हें आपकी चिंता लगी रहती है। वो तो सीमित संसाधनों में ही जी लेते है। उनको दो समय भोजन, चाय-नाश्ता, दो जोड़ी वस्त्र में ही गुजारा कर लेते हैं। वो अपने बच्चों से जल्दी कुछ मांगते भी नही है। पर वो ये जरूर चाहते है की मेरा बच्चा ज्यादा नही तो एक दिन में कम से कम कुछ क्षण मेरे पास बैठ कर मुझसे बाते करे, पर क्या आप अपने माता पिता को अपने चौविस घन्टे में से पाँच मिनट भी उन्हें नहीं दे सकते? क्या आप उनके पास बैठ कर कुछ क्षण उनसे प्रेम से बाते करते हैं? नही करते, आप सिर्फ दिखावा करते है।


कभी अकेले में बैठ कर सोचिये कल आप भी वृद्ध होंगे और आपके बच्चे आप के साथ ऐसा ही आचरण करेंगे तो आप को उस समय कैसा लगेगा, और जरूर करेंगे आपके बच्चे आपके साथ क्योकि आज वो जो देख रहे है, कि आप अपने माता-पिता के साथ कैसा व्यवहार कर रहे है? वो वही सीखेंगे जो देखेंगे और आपके वृद्ध होने पर आपके साथ वैसा ही करेंगे भी। आज वो लोग भी सोशलमीडिया पर जोर-शोर से दिखावा कर रहे हैं, जिनके माता-पिता आज वृद्धाश्रम में पड़े है, या जो कभी अपने माता-पिता से प्यार के दो बोल भी नही बोलते है। जिधर देखो उधर हैपी मदर्स डे मातृ दिवस मना रहे है।


ये दिखावा करने से अच्छा है की ज्यादा नही पर थोड़ा सा तो आप उनको वह दे जो वो चाहते है। पता है आपको कि वो क्या चाहते है, तो मैं अपना अनुभव बता रहा हूँ। ज्यादा कुछ नही चाहते। वृद्ध माता-पिता आपको खुश देखना चाहते है। उनको दो बार समय से भोजन, चाय-नाश्ता दो जोड़ी वस्त्र और विशेष रूप से आपका थोड़ा समय..बस। वो चाहते है की मेरा बच्चा मेरे पास बैठ कर कुछ देर मुझसे प्यार से बाते करे मेरे बारे में पूछे कुछ अपने बारे में बताये, पर आज लोग इतना भी नही कर सकते है।


ऑफिस जाने से पहले ज्यादा नही दस मिनट ही आप अपने माता-पिता के पास बैठिए, उनसे पूछिये की आप को क्या चाहिए, बताइये मैं ऑफिस से लौटते समय लेता आऊँगा या आपको किसी प्रकार का कोई कष्ट तो नही है? आपकी तबियत कैसी है या आपको आज क्या खाने की इच्छा है? सप्ताह में कम से कम एक बार माता पिता से एकांत में भी बातें कीजिए। बहुत सी बातें होती है उनके मन मे आपसे कहने के लिए पर वो सबके सामने नही कह पाते है। सोचते है कभी एकांत में बात कर लेंगे, पर वो समय हम उनको कभी देते ही नही और उनकी भावना उनके मन मे ही दफ़न हो के रह जाती है, और वो वृद्ध माता-पिता एकांत में घुट घुट के रोते रहते है वो खुल कर कभी रो भी नही पाते है।


Comments