कोरोना से बचाव के लिए विंध्यधाम में अहर्निश जलता रहेगा दिव्य अग्निकुंड


गंगा-आरती में प्रार्थना-कोरोना को समंदर में बहा दो मां


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : मंत्रों के एक-एक अक्षर में रूप-स्वरूप, परिवेश-चिंतन को बदल देने की क्षमता का उल्लेख सिर्फ आध्यात्मिक ही दृष्टि से नहीं बल्कि वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में भी इस महत्ता पर चिंतन-मनन होता रहता है । सामान्यतया *जो बात दवा से हो न सके वह बात दुआ से होती है, सच्चा सद्गुरु मिल जाए तो बात खुदा से होती है* भजन से यह स्पष्ट भी होता है कि मंत्रों के बल पर अद्भुत प्रयोग और शोध होते रहते हैं । यहां सद्गुरु का अर्थ ही सच्ची और विधिक साधना से लिया जाता है ।


विंध्यधाम में अहर्निश गूंजते है मंत्र


 आध्यात्मिक राजधानी  काशी के विंध्यखंड में स्थित सिद्धपीठाधीश्वरी मां विंध्यवासिनी का धाम, मंत्र-साधना का धाम है । यहां स्वयं नारायण आए तो उनकी सहधर्मिणी मां लक्ष्मी आईं ।  कंस के हाथों से छूटकर योगमाया देवताओं द्वारा दिए गए दिव्य-रथ पर आरूढ़ होकर कंस की मौत की उद्घोषणा करते हुए आईं । पिता सूर्य से उपेक्षित यम ने इसी विन्ध्यपर्वत पर तपस्या कर धर्मराज की उपाधि महादेव से प्राप्त की ।


मंत्रशक्ति से काल को चुनौती देने  मैदाने-जंग में उतरा विंध्य पंडा समाज


मानव-जाति के लिए महामारी कोरोना के काल बनकर निकृष्ट नृत्य करने से उद्वेलित जनमानस के रक्षार्थ पंडा-समाज यद्यपि विगत 20 मार्च से ही मां विंध्यवासिनी की चारो आरती (मंगला, मध्याह्न, सायं तथा शयन) तथा हवन में लोक-रक्षार्थ प्रार्थना कर रहा है । लेकिन 25 मार्च से लॉकडाउन के 2 माह पूर्ण होने पर वीटो पावर प्रयोग करने के रूप में विशेष अनुष्ठान की योजना को आकार दिया है । 


हवनकुंड की अग्नि निरन्तर प्रज्वलित रहेगी - विंध्यपण्डा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी  के अनुसार प्रतिदिन एक कुंटल आम की लकड़ी से हवन-कुंड में समन्त्र आहुति दी जा रही थी । अब इसके रुप को और प्रभावशाली बनाने के लिए हवन कुंड की अग्नि अहर्निश दिव्य रूप में जलती रहेगी । इस दिव्यता के लिए हवन की सामाग्री की मात्रा बढ़ाई गई है ।


घर घर दीप-प्रज्वलन - दीप-प्रज्वलन एवं श्रीदुर्गासप्तशती पाठ का सबसे बड़ा केंद्र विध्यधाम है । युवा तीर्थपुरोहित त्रियुगीनारायण मिश्र 'मिट्ठू' इस महिमा को परिभाषित करते हैं कि गाय के घी का दीपक वायुमंडल के विषाणुओं को नष्ट करने में सर्वाधिक प्रभावशाली होता है । मिट्टी के दीपक में तेल एवं घी से लेकर उसकी ज्योति, रंग-धुआं आदि में विविध ग्रहों का वास होता है। यह मनुष्य जीवन के लिए बहुत ही प्रभावशाली होता है। घर के अंदर घी का और घर के बाहर पीपल आदि वृक्ष के नीचे तेल का दीपक जलाने का प्राविधान इसलिए है क्योंकि तेल शनि का और घी मंगल का सूचक है ।


सदस्य एकजुट -  पूर्व कोषाध्यक्ष गौतम द्विवेदी के अनुसार समाज के सभी सदस्य हवन-पूजन में बढ़कर योगदान के लिए एकजुट हैं । उन्होंने पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी के लिए कहा कि अपने नाम के अनुसार लॉकडाउन से प्रभावित सभी सदस्यों के लिए कमलवत हैं । किसी को मुरझाने नहीं दे रहे हैं । पंडा समाज के लिए खुशबू बिखरने में लगे हैं। 


मां गंगा से प्रार्थना - गंगोत्री में पर्वत के उद्गम के बाद पहली बार पर्वतीय खंड विंध्यक्षेत्र में गंगा का रूप वैदिक हो गया है । गंगा के यहां आते ही कौथुमि एवं जेमिनी शाखा की पूजन-पद्धति शुरू हुई । दक्षिण दिशा में पर्वत एवं वन-संपदा के चलते कुश से पूजन पद्धति को कौथुमि एवं उत्तर दिशा में बालू की वेदी से हुए पूजन को जेमिनी पद्धति कहते हैं । दोनों पद्धतियों से पूजन का मिलन यही होता है ।


गंगा की नित्य-आरती 2015 में यहां DM रहे राजेश सिंह एवं सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार मिश्र के कार्यकाल से शुरु गंगा-आरती के मुख्य अर्चक रामानन्द तिवारी ने  भव्य होने वाली नित्य आरती में मां गंगा से आर्तनाद शुरू कर दिया । कोरोना को बहाकर ले जाओ मां, समंदर में इसको डूबो दो माँ की प्रार्थना 24 मई से शुरू हो गई है । 


हर श्रद्धालु ऐसा करे - इस प्रकार की प्रार्थना हर श्रद्धालुओं को करनी चाहिए । समूह में की गई प्रार्थना का असर पड़कर रहता है ।


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