कोरोना के कहर से अभी निजात सम्भव नहीं,लॉक डाउन का पालन ही बचाव : ज्योतिषाचार्य सरस्वती देवकृष्ण गौड़


भारतीय ज्योतिषीय गणना के आधार पर इस वर्ष के प्रारम्भ एवं कोरोना के कहर पर जब हमने ज्योतिषीय आंकलन किया तब निष्कर्ष के रूप में ये सामने आया कि कोरोना का कहर अभी लंबे समय तक जारी रहेगा।


विश्व के सम्पूर्ण देश अंग्रेजी नववर्ष से वर्ष भर की गणना प्रारम्भ करते है। वर्तमान वर्ष 2020 है, जिसका योग 4 बनता है। अंकशास्त्र के अनुसार 4 अंक का स्वामी राहु ग्रह है।


जब नववर्ष 2020 का प्रारम्भ 1 जनवरी को हुआ उस समय राहु छठे भाव अर्थात रोग भाव में स्थित था और इसका राशि स्वामी बुध सूर्य के साथ अस्त होकर पहले भाव में स्थित था।राहु की सप्तम दृष्टि बृहस्पति पर पड़ रही थी जो 12वें भाव में अपने शत्रु ग्रह शनि व केतु के साथ युति बनाकर बैठा था।


राहु के रोग भाव में स्तिथ होने के कारण अपने स्वभाव अनुसार अचानक लाइलाज बीमारी को उतपन्न करना, सप्तम दृष्टि शनि को देखने से विषाणु के रूप में रोग का होना,स्वांसों व आयु के कारक बृहस्पति पर सप्तम दृष्टि डालकर मृत्यु का कारक बनकर सम्पूर्ण विश्व में मृत्यु को विस्तारित कर देना ये इस वर्ष के राहु के ज्योतिषीय घटनाक्रम को इंगित कर रहा है।


चूंकि राहु अचानक से घटित होने वाली उन अप्रत्याशित घटनाओं का कारक है, जिसका मात्र अनुमान लगाया जा सकता है।धुंए की तरह इसका स्वभाव होता है और धुँवा किस दिशा की तरफ जाएगा स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है।राहु शनि की युति विषाणु के उतपन्न की कारक होती है जो धुंवे की तरह तीव्र गति से वातावरण में फैल कर अपना प्रभाव दिखातीहै।


जैसे ही 2020 का आगमन हुआ राहु ने अपना असर दिखाना प्रारम्भ कर दिया चूंकि वर्ष का प्रारम्भ ही रोग भाव में स्थित राहु से हुआ है और राहु अपनी उच्च राशि में बैठा है तो इससे उतपन्न इसके दुष्परिणाम को रोकना अथवा निजात पाना अन्य ग्रहों की तुलना में बहुत कठिन हो रहा है।


सूर्यग्रहण के समय जब राहु सूर्य की आभा को अपनी छाया से ढक लेता है उस समय केवल मात्र उससे बचाव के रूप में एक तरह से लोगों को आइसोलेट ही होना पड़ता है ताकि उसके दुष्प्रभाव से स्वयं को बचाया जा सके।


हवा में जब कोई विषाणु फैलता है तो वो राहु शनि व बृहस्पति की किसी भी रूप में युति के कारण घटित होता है।ऑक्सीजन और हवा बृहस्पति की कारक होती है और जब उस हवा में विषाणु उतपन्न हो जाये तो वो बृहस्पति को दुष्प्रभावित करता है।गुरु और राहु की युति गुरु चांडाल योग का निर्माण करती है जिसमे राहु के प्रभाव के कारण गुरु कमजोर व निर्बल हो जाता है।बृहस्पति आयु,स्वांस,गला और फेफड़ों का कारक ग्रह है और कोरोना के दुष्प्रभाव के रूप में सबसे पहले गले में कफ बढ़ता है, फिर स्वांस लेने में तकलीफ होने लगती है, उसके बाद फेफड़े कार्य करना बंद कर देते है और अंत में व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।


कोरोना वायरस राहु का कारक बनकर पूरे विश्व को प्रभावित कर रहा है।राहु टेक्नोलॉजी का कारक भी है जो देश जितना ज्यादा टेक्नोलॉजी में आगे है उस पर कोरोना का प्रभाव उतना अधिक दिखाई दे रहा है।


इस पूरे वर्ष राहु मिथुन राशि में स्थित होकर उच्च का हो रहा है और मिथुन राशि का स्वामी बुध है।बुध बुद्धि का कारक ग्रह है।राहु का बुध की राशि मे होना बुद्धि की सोचने समझने व युक्ति निकालने की शक्ति को प्रभावित करके भ्रमित कर देता है। इसी कारण से वैज्ञानिक अपनी तमाम कोशिश करने के बाद भी कोरोना का इलाज ढूंढ पाने में असमर्थ हो रहे है।


अचानक से जब कोई दुर्घटना घटित हो जाती है,शेयर मार्केट अथवा व्यापार में कोई बहुत बड़ा घाटा हो जाता है तो उस नुकसान की भरपाई में समय लगता है।ठीक इसी प्रकार राहु द्वारा उतपन्न इस कोरोना रूपी महामारी से स्थितियां सामान्य होने में अभी काफी वक्त लगेगा।इसमें सब्र की महती आवश्यकता है।


राहु चौथे घर में अर्थात माँ के घर मे अपना बुरा प्रभाव छोड़ देता है।ये ही कारण है कि कोरोना से बचाव का सबसे कारगर उपाय स्वयं को अपने ही घर मे आइसोलेट कर देना है।


भारतीय नववर्ष के प्रारम्भ में चैत्र की संक्रांति में भी पंचांग में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि


" रोग, शोक,व्याधि गति,संक्रामक अतिचार। स्वास्थ्य तंत्र ने न्यूनता,पांच रूप शनिवार।।"


अर्थात निर्णय सागर पंचांग अनुसार भारतीय नववर्ष के प्रारम्भ में कोई रोग,व्याघि तीव्र गति से वातावरण में फैलेगी जो किसी संक्रमण के रूप में होगी।पांच शनिवार तक ये स्वास्थ्य तंत्र को पूर्ण रूप में प्रभावित करके स्वास्थ्य को खराबी की और ले जाएगी।


अन्य देश इस बीमारी से बचने के तमाम उपाय करने लगे और भारत के द्वारा अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए लॉक डाउन के माध्यम से राहु को निष्प्रभावी किया गया एवं उसके संक्रमण को कंट्रोल करने का प्रयास किया गया।जिसमें काफी हद तक भारत सफल भी रहा।


ज्योतिषीय गणना के अनुसार स्थितियां सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा।जुलाई मध्य में एक बार फिर ये संक्रमण पुनः विकराल रूप में उठ सकता है जब राहु, चंद्रमा और बुध की युति के साथ 12वें भाव में आएगा और सप्तम दृष्टि से आयु के कारक बृहस्पति को देखेगा जो छठे भाव में बैठकर इस वायरस से पुनः लड़ने का प्रयास करेगा।हालांकि इसका दुष्प्रभाव विदेशों में अधिक देखने को मिलेगा जिनकी दिनचर्या सात्विक रूप में नहीं होगी।


सितंबर मध्य में जब राहु राशि परिवर्तन करके अपनी उच्च राशि शुक्र में गोचर करेगा तब इस वायरस के कहर से बचाव कही सम्भव हो पायेगा।


अतः कोरोना से बचने के लिए जहाँ तक सम्भव हो परिस्थिति की गम्भीरता को देखते हुए स्वयं एवं अपने परिवार को घर में लॉक डाउन करके रखे।अध्यात्म को अपनाते हुए सात्विक भोजन को ही ग्रहण करें।राहु से सम्बंधित वस्तुओं से दूर रहना आवश्यक है।एसी का उपयोग बिल्कुल नहीं करे। फ्रिज की ठंडी वस्तुओं से बचकर रहे।एल्युमिनियम के बर्तन में पका हुआ भोजन ग्रहण न करें और सुबह की स्वच्छ व ताजी हवा में प्राणायाम करके अपने बृहस्पति को बल प्रदान करे।इसके अलावा भोजन में अधिक से अधिक हल्दी का उपयोग करें।माथे पर प्रतिदिन केसर का तिलक लगाना आयु वृद्धि में सहायक होगा।आयुर्वेदिक काढ़ा और जड़ी बूटियों का प्रयोग निरंतर करते रहे।


चूंकि कोरोना से बचाव ही इसका उपचार है अतः इस बात को भलीभांति ध्यान में रखते हुए इस संकट की घड़ी में सब्र व धैर्य को अपनाते हुए लॉक डाउन का विधिवत पालन करें एवं अपने जीवन की सुरक्षा स्वयं करें।


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