किसान की व्यथा (गीत)


✍️  अनुरंजन कुमार "अँचल" (अररिया, बिहार)


हाँ, किसान हूँ , मैं  किसान हूँ
पूरे  देश  का  मैं अभिमान हूँ
मुझे देखने  वाला कोई नहीं है
दुख को लेने वाला कोई नहीं है।


हाँ, किसान  हूँ, मैं  किसान हूँ
 कष्टों को उठाने वाला इंसान हूँ
यहां के नेता लोग कहते हैं मुझे
वह  शैतान है , वह  शैतान है।


हाँ, किसान हूँ, मैं किसान हूँ
इस देश की मिट्टी का शान हूँ
इस  देश का नेता  बेईमान है
उनकी बात पर नहीं ईमान है।


हाँ, किसान हूँ, मैं किसान हूँ
इस मातृभूमि का सम्मान हूँ
हर परिवारों  का भगवान हूँ
हाँ,बेईमान का भी मैं जान हूँ।


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