" जान भी है, जहान भी है "


रिपोर्ट : डॉ0 वसुंधरा राय


जिस प्रकार भारत ने अन्य देशों की दशा देखकर लॉकडाऊन का निर्णय लिया वह भारत सरकार का प्रशंसनीय कदम है। वर्तमान में कोरोना जैसी गंभीर बिमारी से सबसे अधिक प्रभावित फ्रांस, इटली, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस देश हैं। जहां मृत्यु का आंकड़ा सर्वाधिक है तथा भारत 12वें स्थान पर है। भारत में अब 85,985 लोग कोविड 19 से ग्रस्त हैं तो वहीं दूसरी ओर 30,967 लोग इस बिमारी पर विजय प्राप्त कर अपने अपने घर भी वापस हुए हैं तथा अब तक 2,5852 लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है।


भारत सरकार देशहित में निरंतर लॉकडाऊन की अवधी बढ़ाती भी जा रही है, तथा इस बार प्रधानमंत्री ने चौथे लॉकडाऊन को अन्य लॉकडाऊन से अलग होने के संकेत भी दिए हैं। जिससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी जी ने पिछले वक्तव्य में "जान भी है, जहान भी है" को सार्थक रूप देने की योजना पर दृढ़ता के साथ इस महामारी के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी कार्य आरंभ कर दिया है। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर होने के लिए प्रेरित किया है जितना संभव हो भारत निर्मित संसाधनों का अपने आम जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया है।


कोरोना वायरस आजतक रहस्यमय है कि ये वायरस का जन्म खुद से हुआ है या इसे साजिश के तहत पाल-पोस कर विश्व को परोस दिया गया है, इसकी तह तक पहुंचना अति आवश्यक है। चीन को आज पूरी दुनिया शक़ की नज़र से देख रही है। पिछले कुछ महिनों में ही यह वायरस पूरी दुनिया में पहुंच कर लोगों को जिंदगी दहशत में जीने को मजबूर कर चुका है। अमेरिका, इटली, ईरान, स्पेन, इंग्लैंड और अब भारत में पहुंच कर हाहाकार कर रहा है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है, बस सावधानी ही एकमात्र उपाय है। भारत में अब तक पुष्टि किए गए केस 23,077 ठीक हो गए केस 4,749 और मृत्यु 718 दर्ज हुई हैं। अब तक भारत सरकार ने देशहित में जो निर्णय लिए हैं, वो सराहनीय हैं। जैसे देश आर्थिक चुनौतियों से कैसे निपट सकता है। जिसके लिए कोविड 19 आर्थिक बल के गठन की घोषणा की है। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह संगठन सभी हितधारकों के संपर्क में रहेगा तथा प्रतिक्रिया मिलने के आधार निर्णय किया जाएगा। लेकिन कितना प्रभावकारी रहेगा ये आने वाला समय ही तय करेगा तथा आम जनता को कितना लाभ प्राप्त होगा ये दिलचस्प होगा।


सरकार के द्वारा आरोग्य सेतु एप के माध्यम से एक और अहम कदम उठाया है। जिससे सरकार और आम जनता के बीच सीधा कनैक्शन किया जा सकेगा। भारत सरकार ने कोविड 19 के संक्रमण को रोकने के लिए भारत की जनता के हित के लिए जिस प्रकार आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है, वह सराहनीय कदम है। जिसमें घरों में रह रहे लोगों पर भी सरकार की नज़र रहेगी। आरोग्य सेतु एप स्मार्ट मोबाईल धारक अपने फोन पर यह एप डाऊनलोड करना होगा तथा वहां जो जो प्रश्न पूछें जाएं व्यक्ति को सही सही जानकारी उपलब्ध करानी होगी, तब जाकर यह एप व्यक्ति के हित में कार्य कर सकेगा। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी अपनी भाषा सुविधानुसार इस्तेमाल किये जाने की तैयारी है तथा इसमें व्यक्ति की निजता का पूरी तरह से ध्यान रखा गया है।


रेल मंत्रालय की ओर से भी आम जनता के हित में सरहानीय कदम उठाए हैं। भारतीय रेलवे अपने सामर्थ्य के साथ 5,000 कोच को आइसोलेशन कोच में तब्दील करने में सफल कदम उठा चुका है तथा बहुत कम समय में 2500 तक कोच को आइसोलेशन कोच बना भी चुका है। कोविड 19 से संबंधित उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। भारत में रेलवे अस्पतालों की संख्या 125 हैं जिनमें 70 से अधिक अस्पतालों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है।
अचानक आवश्यकता पड़ने पर रेलवे अस्पतालों में बैड की व्यवस्था करी जा रही है।


इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के सभी सरपंचों से सीधे संवाद करके स्वराज पोर्टल है। मोबाइल एप की घोषणा की जिससे ग्रामीणों को सुविधाओं के साथ साथ सतर्कता बरतने के लिए जागरूक किया जाएगा तथा सोशल डिस्टैंस को सरल भाषा में दो गज की दूरी कह संवाद स्थापना करने की एक अच्छी पहल है। दुनिया में अमीरों में अमीर बिल गैट्स ने भी प्रधानमंत्री मोदी जी की कोरोना जैसे गंभीर महामारी के लिए गये निर्णयों की तारीफ की है । स्वीज़रलैंड के कलाकार द्वारा 14,690 फीट ऊंचे पर्वत मैटरहौर्न पर रौशनी से तिरंगा बनाया तथा कोरोना जैसी गंभीर बिमारी में हम सब साथ साथ हैं का संदेश दिया।


पूरे विश्व में आज भारत की प्रसंशा की जा रही है जो किसी भी भारतीय के लिए गर्व की बात हो सकती है। इसके अलावा सालों साल से आम जनता में भारतीय पुलिस की छवि बनी हुई थी वो भी धूमिल होती दिख रही है। कहीं पुलिस किसी गरीब को अपने हाथों से खाना खिलाती दिख रही है तो किसी को राशन देते हुए दिख रही है ऐसे बहुत से सराहनीय उदाहरण हैं जिससे आम जनता में उनकी छवि किसी भगवान से कम नहीं। सफाई कर्मचारियों ने भी अपनी ड्युटी को निभाते हुए देशभक्ति में अपना नाम सम्मान के साथ दर्ज करा लिया है। ऐसा पहली बार हुआ कि सफाईकर्मियों पर फूल बरसा कर उनका धन्यवाद अदा किया गया।


डॉक्टरों ने भी देशभक्ति का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है कि आज आम जनता के लिए वे किसी देवता से कम नहीं। लेकिन इसी देश में कुछ मूर्खों ने राक्षसो जैसा आचरण अपना कर उनपर व उनके जैसे जो लोग भी देशहित आमजनता के हितों में अपना सबकुछ त्याग कर समर्पण भाव से दिन रात लगे हुए हैं उन्ही पर पत्थरबाज़ी करने से नहीं चूक रहे। लेकिन सरकार ने इसको गंभीरता से लिया है तथा सज़ा का प्रावधान किया है। आए दिन डॉक्टरों एवं चिकित्सा कर्मियों पर पुलिसकर्मियों पर व अन्य लोगों पर हमले की घटनाएं हो रही हैं।


सरकार ने यह फैसला लिया है कि डॉक्टर पर हमला करना गैर जमानती अपराध बना दिया है। जिसमें 3 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही 50,000 से 200000 का जुर्माना भी तय हो चुका है। अगर ज्यादा नुकसान पहुंचा तो यह सजा 6 महीने से लेकर 7 साल की सजा हो सकती है। इस बारे में 30 दिन के बाद मुकदमा चलना शुरू हो जाएगा और फैसला 1 साल में किया जायेगा। अगर किसी भी स्वास्थ्य कर्मी या डॉक्टर की गाड़ी का नुकसान हुआ है तो इसके लिए हमला करने वाले व्यक्ति पर मार्केट दर से 2 गुना मुआवजा लिए जाने का प्रावधान किया गया है। बता दें कि इससे पहले भारतीय चिकित्सा संघ आईएमए ने कोरोना वायरस संकट के दौरान अपनी ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर होने वाले हमलों के विरोध में जब प्रदर्शन का फैसला लिया था जिसके बाद  सरकार से आश्वासन दिया उसके बाद विरोध प्रदर्शन को वापस ले लिया।


भारत सरकार द्वारा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उठाए गये कदम निश्चित रूप से प्रशंसनीय हैं माना आज देश में पुरूषों में शिक्षा 74.04 प्रतिशत है तथा महिलाओं में शिक्षा 82.14 हैं। लेकिन इस बिंदु पर भी विचार करने की आवश्यकता है कि भारत की आम जनता इस तकनीक का कितना ज्ञान रखती है ? क्या भारत के सभी लोगों के पास स्मार्ट फोन या एनरॉयड फोन उपलब्ध हैं ? यदि हैं भी तो क्या उनको सही तरीके से इस्तेमाल करना आता है ? और जिनके पास साधारण फोन ही हैं उन तक जानकारी कैसे उपलब्ध कराई जाएगी ? 


भारत को कोरोना के अलावा अन्य पहलुओं पर भी सामना करना पड़ रहा है जो भारतीयों के लिए बेहद चिंतनीय है। कोरोना को धर्म से जोड़कर देखना भी आश्चर्यजनक है! तमाम बुद्धीजिवियों से एक ही सवाल क्या कोरोना वायरस किसी भी व्यक्ति से पूछता कि किस धर्म के हो तब वो शरीर में प्रवेश करता है ? टी वी चैनलों पर धर्म के नाम पर जिस तरह बहस की जाती है जो वर्तमान की पत्रकारिता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है कि क्या यही पत्रकारिता है ? कोरोना की बिमारी किसी धर्म जाति को देख कर निर्णय नहीं लेती। 


सरकार यथा संभव देशहित में योग्य कदम उठा रही है, लेकिन क्या ये कदम उठाने में सरकार से चूक हुई हैं ? कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी पर 28 मार्च 2020 से सरकारी तंत्र ने सावधानी रखना आरंभ कर दिया था। विदेश से आने वालों पर नज़र रखी जाने लगी थी लेकिन प्रश्न यहां ये उठता है कि यदि यात्रियों की स्क्रिंनिंग आरंभ कर दी गयी थी तो अब तक ये संक्रमण बढ़ता ही क्यों जा रहा है ?


18 जनवरी से 26 मार्च तक विदेश से आने वालों की संख्या लगभग 15 लाख है तो क्या ये समझा जाए कि कोविड 19 संक्रमण को रोकने में सबसे बड़ी लापरवाही यहीं से आरंभ हुई यदि हां तो इसके ज़िम्मेदारी कौन लेगा ? सुनामी जैसी प्रलय की चेतावनी भी दी गयी थी, लेकिन उस चेतावनी को अनदेखा करना देश को मंहगा पड़ा। सराहनीय कदम उठाने के बाद भी ज़मीनी हक़िक़त आने वाला समय ही तय करेगा।


मजदूरों, सब्जिवाले और हर वो व्यक्ति जिनकी रसोई रोज़ के काम से मिलने वाली धनराशि पर निर्भर रहती है उनके लिए ये समय काटना किसी सज़ा से कम नहीं है। आरंभ जैसा भी रहा हो लेकिन सरकार के द्वारा वर्तमान में देशहित के संदर्भ में उठाए गये साकारात्मक कदमों को भी नकारा नहीं जा सकता है मगर फिर भी इस दूरदर्शिता को यदि जनवरी से ही अमल में लाया जाता तो आज स्थिति कुछ हो सकती थी। जितने भी सराहनीय कदम उठाए गये हैं ज़मीनी हक़ीक़त तय करेगी कि सरकार कितनी सफल हुई ?


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