गैर प्रांतों से आए लोगों के लिए मनरेगा योजना में काम



  • पढ़े-लिखे युवक और महिलाएं नहीं ढो पाएंगी बोझा !

  • पुलिस सतर्क कहीं बेरोजगार अपराध में न लग जाएं


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, ( उ0प्र0) : गैर प्रांतों से कामकाज छोड़कर वापस आ रहे लोगों की रोजी रोटी की समस्या का सामना करने की बड़ी चुनौती विकराल मुंह बाए खड़ी हो गई है । वैसे भी रोजगार-विहीन मिर्जापुर जिले से लोग पेट भरने के लिए महानगरों, औद्योगिक नगरों की ओर अरसे पहले पलायित हुए थे । कुछ तो कई पीढ़ी पहले से महानगरों में रहने लगे थे लेकिन कोरोना ने उन्हें फिर यही लाकर पटक दिया है ।


सब कुछ गवां के आए लोग - महानगरों में कोरोना के विभत्स रुप से घबराए-डरे लोग जब फिर अपनी जन्मभूमि की ओर लौटे हैं तो समझ ही नहीं पा रहे कि क्या करें क्या न करें ? इस द्वंद्वात्मक स्थिति में काम मिल गया तो ठीक वरना *बुभुक्षित: किम् न करोति पापम्* का दंश इन्हें झेलना पड़ेगा ।


जो उबेंगे वे कुछ भी कर सकते हैं - दो वक्त की रोटी से जो वंचित होंगे, वे क्या क्या कर सकते हैं, इस पर समाजशास्त्रियों की अलग-अलग राय है । कुछ का मानना है कि बहुतेरे अवसाद (डिप्रेशन) में आएंगे । ऐसी स्थिति में आत्महंता कदम उठाने के लिए मजबूर होने की संभावना रहेगी जबकि बाल-बच्चों को बिलबिलाता देख कुछ अपराध जगत की ओर रुखसत कर सकते हैं।


लूट, चोरी, उठाईगिरी, छिनैती की घटनाओं में इजाफा - मजबूर व्यक्ति के सामने जब कोई विकल्प नहीं बचता तो वह इस तरह की घटनाओं की ओर  वह मुड़ता है । लिहाजा दुकानों के शटर टूटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं । बाइक गायब होने की घटना धड़ल्ले से हो सकती है । रात होते सड़क पर रोक कर लूट, बैंकों से पैसा निकाल कर जा रहे लोगों से छिनैती आदि की घटनाएं यदि बढ़ती हैं तो पुलिस का सिरदर्द बढ़ना स्वाभाविक है।


सरकारी व्यवस्था इन्हीं संभावनाओं पर ब्रेक लगाने के लिए इस बार मनरेगा योजना को तवज्जह ज्यादा दिया जा रहा है। जो विभाग मनरेगा योजना का काम नहीं करते थे, उन्हें भी मनरेगा योजना में काम के लिए लगाया जा रहा है । सरकार का अति महत्वपूर्ण विभाग PWD और सिंचाई विभाग भी इस वर्ष मनरेगा में सड़क, पुलिया, नहरों की सफाई-मरम्मत, लिंक रोड, पटरी-खड़ंजा के निर्माण के साथ वृक्षारोपण जैसे काम मनरेगा से करेगा । वन विभाग भी इस योजना में पेड़ लगवाएगा । अकेले PWD मण्डल के तीनों जनपदों में 20 लाख मानव-दिवस सृजित कर काम कराएगा । विभाग एक श्रमिक से 365 दिन काम कराता है तो इतने मानव दिवस हुए । 2 से कराता है तो इसका दूना दिवस हुआ । इस प्रकार लगभग साढ़े 5 हजार श्रमिक यदि 365 दिन काम करते हैं तो 20 लाख दिवस माना जाएगा ।


PWD का बजट - मण्डल के तीनों जनपदों में इस विभाग को साढ़े 47 करोड़ रुपए दिए गए हैं जिसमें सोनभद्र के लिए 24 करोड़ में 10 लाख मानव दिवस, मिर्जापुर को 18 करोड़ में साढ़े 7 लाख मानव दिवस और भदोही को साढ़े 5 करोड़ में ढाई लाख मानव दिवस सृजित करना है।


60% और 40% का अनुपात - मनरेगा में शासन ने तय किया है कि 60% मजदूरी पर तथा 40% मैटेरियल पर खर्च होगा । इसमें ठीकेदारी सिस्टम से काम नहीं होगा । मजदूरी के इस काम में उन लोगों को दिक्कत आएगी जो बाहर नौकरी लिखापढ़ी का काम करते थे, बोझा ढोने का नहीं । इसमें पढ़ी-लिखी महिलाएं भी हैं । इनके लिए भी समाधान ढूढना होगा ।


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