दो दिनों से विशेष पूजा-अर्चना से सुकून :  विंध्याचल और गायत्री परिवारमें हवन-यज्ञ जारी



  • अपने स्वास्थ्य का डॉक्टर खुद बनने की सलाह

  • आ बैल मुझे मार से बचें


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मिर्जापुर, (उ0प्र0) : मां विंध्यवासिनी के धाम में विशेष पूजन-हवन, गायत्री परिवार द्वारा सदस्यों के घर यज्ञ-हवन, मुस्लिम समुदाय द्वारा ईद की नमाज़ में दुआ और सिख समुदाय द्वारा गुरुद्वारे में की जा रही प्रार्थना के बाद 10 मरीजों के पॉजिटिव से निगेटिव होने पर ज्येष्ठ माह का तीसरा मंगल सुकून देते आया। जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट कम्पाउंड में महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी कार्यालयों में अपनी-अपनी सीटों पर बैठकर जनता से मिलते, मीटिंग करते दिखाई पड़े क्योंकि जिले में कोरोना का तूफान थमा हुआ सा रहा। लगातार दो दिनों से 5-5 की संख्या में पॉजिटिव से निगेटिव आती रिपोर्टों ने अधिकारियों के चेहरे पर तनाव की लकीरों को कम किया है।


मेडिकल विशेषज्ञों की राय -  बहुतांश लोगों में प्रायः यह धारणा थी कि स्वस्थ रहने के लिए जी-भरकर भोजन करना चाहिए, जितना खाएंगे उतना ही तन्दरुस्त रहेंगे लेकिन मेडिकल डॉक्टर लगातार यही समझाते हैं कि यह सोच सही नहीं है। आध्यात्मिक ग्रन्थों में भी पेट सिर्फ दो भाग भरने का उल्लेख है। एक भाग भोजन के एक घण्टे बाद पानी तथा एक भाग ऑक्सीजन के लिए खाली रखना चाहिए।


कोरोना ने बाध्य कर दिया इस फार्मूले को अपनाने के लिए - इस महामारी की चपेट में आकर स्वस्थ हुए 13 मरीजों की जीवन-शैली ने इस पर मुहर-ठप्पा लगा दिया। क्योंकि जिन लोगों को अन्य कोई बीमारी नहीं थी और वे संक्रमित लोगों के संपर्क में आकर बीमारी बतौर गिफ्ट पा गए थे, उनको क्वारन्टीन के दौरान सिर्फ इम्युनिटी और बढ़ाने की दवा दी गई तो वे स्वस्थ हो गए।


किनके लिए घातक - जिले में कोरोना से किसी जन-हानि की स्थिति फिलहाल नहीं हुई हैं लेकिन डॉक्टरों के अनुसार जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी थी, वे यदि इस बीमारी की चपेट में आए तो उन्हें बचाने में भारी दिक्कतों की रिपोर्ट सामने आ रही है।



आ बैल मुझे मार - इन सारे निष्कर्षों से यही उजागर होता है कि मनुष्य यदि ‘आ बैल मुझे मार’ से बचता है तो शरीर खुद ही बड़ा डॉक्टर है। वह खुद ही भयानक से भयानक बीमारी से लड़ता है और बचाता भी है । लेकिन जब व्यक्ति अपने शरीर को कूड़ाघर बना  लेता है और अखाद्य वस्तुओं को नगरपालिका/महापालिका के डस्टविन बना लेता है तो सड़न/दुर्गंध तो उठनी ही है ।


अपना स्वास्थ्य अपने हाथ - ऐसी स्थिति में अपना स्वास्थ्य अपने हाथ है । भोजन, नाश्ते का नियम होना बीमारी से बचाव का प्रथम सोपान है। इसके अलावा हड़बड़ी में, जल्दी जल्दी, बातचीत करते हुए, मोबाइल देखते हुए भोजन ही नहीं चाय तक नहीं पीनी चाहिए । जूता-मोजा पहनकर पार्टी में डिनर/लंच सल्फास खाने जैसा घातक है। 


पता नहीं कब तक कोरोना डटा रहे - विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कोरोना के अलविदा होने की कोई निश्चित अवधि नहीं है। अतः योग-प्राणायाम, नियमति दिनचर्या वालों से कोरोना दूर ही रहेगा। अपने स्वास्थ्य का डॉक्टर और यहां तक कि भगवान व्यक्ति को खुद ही बनना चाहिए।


आईजी की सलाह - आईजी पीयूष श्रीवास्तव ने कोरोना की नई गाइड लाइन से अवगत कराते हुए कहा कि वाहन पर एक के अलावा दूसरे व्यक्ति के बैठने पर जुर्माना देय होगा।  विशेष परिस्थिति में दूसरा व्यक्ति उसी हालत में बैठ सकता है जब पीछे का बैठा व्यक्ति भी हेलमेट के अलावा गमछा, मास्क, ग्लब्स से शरीर पूरा ढंके हो। आई जी ने स्पष्ट किया कि वाहनों का चालान उपनिरीक्षक ही करेगा । कांसिटेबिल को यह अधिकार नहीं । 


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