धरतीवाले जब न सुने तो फिर आसमान की ओर निहारे !


रिपोर्ट : सलिल पांडेय


मुंबई में दानी एवं फ़िल्म जगत के शंहशाह अमिताभजी थे, क्रिकेट महापुरुष सचिन तेंदुलकर और इन लोगों की तरह बहुतेरे । गुजरात में सदी के आर्थिक महानायक अनिल अंबानी और उन जैसे ढेरों चमकते सिक्के- तो यहां से क्या जान हथेली पर लेकर हुआ पलायन रोका जा सकता था ?


क्या बाबा रामदेव और उनके ही टाइप के बहुतेरे सक्षम प्रवचनकर्ता जगह जगह अपने आश्रम ठोकर खाते नर-नारी, कातर नज़र वाले बच्चों के लिए सेवालय घोषित कर देते तो अंतहीन पीड़ा पर मरहम न लग जाता ?


क्या सद्ग्रन्थों में उपदेश सिर्फ मनोरंजन के लिए होता है ?


क्या महामारी सक्षम लोगों के इम्तहान के लिए आई है और इसमें ज्यादा फेल होते नहीं दिख रहे ?


Comments