देश के ग्रामीण हिस्सों में ट्रेल के यूजर्स में हुई वृद्धि


मुंबई : महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच ऑनलाइन सामग्री की खपत में वृद्धि हुई है, विशेषकर भारत के ग्रामीण हिस्सों में। अधिकांश के लिए, यह बदलाव नए युग के विजुअल कंटेंट जनरेशन और शेयरिंग प्लेटफार्मों के सामने आने से हुआ है। ऐसा ही एक उदाहरण है -ट्रेल। यह एक प्रमुख समुदाय-आधारित मंच है जो क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में यूजर-जनरेटेड ओरिजिनल कंटेंट के माध्यम से जीवनशैली खोज को सक्षम बनाता है। अपनी स्थापना के बाद से यह प्लेटफार्म देशभर में स्थानीय उपभोक्ताओं के मनोरंजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।


वीडियो ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म हर आकांक्षी भारतीय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, चाहे उनकी भाषाई पृष्ठभूमि कुछ भी हो। वे समान विचारधारा वाले व्यक्तियों के समुदाय के साथ संबंधित सामग्री साझा कर सकते हैं और अपने स्वयं के अधिकारों से 'की ओपिनियन लीडर' के रूप में उभर सकते हैं। मोबाइल फोन के तौर पर उनके पास अपनी पसंद का उपकरण है जो उन्हें क्षेत्रीय भाषाओं में आकर्षक वीडिोय सामग्री सामग्री देखने के साथ-साथ बनाने का मौका भी देता है और इस यूजर-बेस ने ट्रेल को कहानी सुनाने के लिए अपने पसंदीदा प्लेटफार्म के तौर पर अपनाया है।


इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल शहरी इलाकों में 205 मिलियन सक्रिय यूजर्स की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में 227 मिलियन सक्रिय इंटरनेट यूजर थे। ऐसे में ट्रेल ने देख लिया था कि इस क्षेत्र में बदलाव को हवा देने के लिए माकूल परिस्थितियां हैं। नतीजतन, ट्रेल प्लेटफॉर्म अब टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से 78% से अधिक उपभोक्ताओं का दावा करता है।


वर्तमान में भारत में इंटरनेट की पैठ 40% है और ग्रामीण सामग्री के लिए डिमांड और सप्लाई का चक्र बहुत बड़ा है। इसलिए, देश में ऑनलाइन सामग्री उद्योग में प्रगति की अपार संभावनाएं हैं। और ट्रेल, अपने इनोवेटिव वैल्यू प्रपोजिशन के सहारे इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।


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