चीन में बेस मेटल्स और कॉपर की बढ़ती मांग के कारण कीमतों में वृद्धि


मुंबई : सोमवार को एलएमई बेस मेटल्स की कीमतें सकारात्मक रुख के साथ बंद हुईं; हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बढ़ने से बाजार लगातार चिंताओं से घिरा रहा। चीन की ओर से शुरू की गई प्रोत्साहन योजनाओं से औद्योगिक धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि इसमें बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर खर्च शामिल है। एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के नॉन-एग्री कमोडिटीज एंड करेंसीज के चीफ एनालिस्ट श्री प्रथमेश माल्या ने बताया के बेस मेटल्स की बढ़ती मांग के कारण कीमतों को सपोर्ट मिला है क्योंकि बढ़ती मांग से चीन सबसे प्रमुख बेस मेटल उपभोक्ता बन गया है।


सोमवार को एलएमई कॉपर की कीमतें 1.4 फीसदी बढ़कर 5,362 डॉलर प्रति टन पर बंद हुईं। प्रमुख धातु की कीमतों को चीन का सपोर्ट है क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि कॉपर की मांग बढ़ेगी। लेकिन अमेरिका और चीन के बिगड़ते संबंधों और मंदी के डर से आने वाले दिनों में तांबे की कीमतों पर असर पड़ सकता है।


सोने की कीमतें सोमवार को 1.04 प्रतिशत घटकर 1711.2 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। सोने की कीमतों में गिरावट की वजह व्यावसायिक गतिविधियों के फिर शुरू होने के बाद निवेशकों का जोखिमपूर्ण असेट क्लास में निवेश करने की ओर रुख करना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था यू.एस. और चीन के बीच उभरते तनाव के कारण काफी प्रभावित हो रही है। हालांकि, आर्थिक डेटा दिखाता है कि सेफ-हैवन संपत्ति सोने की गिरावट को सीमित करता है।


स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.58 प्रतिशत घटकर 17.1 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। एमसीएक्स पर कीमतें 0.9 प्रतिशत घटकर 47821 रुपए प्रति किलो बंद रही।


सोमवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 3.3 प्रतिशत बढ़कर 34.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई। कच्चे तेल उत्पादकों की ओर से आक्रामक उत्पादन कटौती ने कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक मांग ने कीमतों को सपोर्ट दिया।मई-2020 से जून-2020 तक ओपेक और उसके सहयोगी अपनी उत्पादन गतिविधियों को प्रति दिन 9.7 मिलियन बैरल कम करने पर सहमत हैं। ओपेक+ जून 2020 में फिर से मिलेगा और तय करेगा कि तेल की कीमतों को कम करने के लिए कम उत्पादन को जारी रखना है या नहीं।


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