कोविड-19 : प्लाज्मा थेरेपी 'डूबते को तिकने का सहारा !


रिपोर्ट : किशोर सिंह


मुंबई : बीते साल दिसंबर में चीन से निकला कोरोना वायरस अब दुनिया के ज्यादातर देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। ये घातक वायरस दुनिया भर में करीब दो लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और इसका कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे विश्व के डॉक्टर, वैज्ञानिक आज इस एक वायरस को रोकने कोशिश में हैं, लेकिन टीके के अभाव में उनके लिए भी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।


ऐसे में कॉन्वालेसंट प्लाज्मा थेरेपी ने थोड़ी उम्मीद जगाई है और भारत समेत दुनिया के कई दूसरे देश भी कोरोना को हराने में इसकी मदद लेना चाहते हैं। कहा जा सकता है कि प्लाज्मा थेरेपी 'डूबते को तिकने का सहारा' की तरह सामने आई है।


इस थेरेपी ने लोगों को समझा दिया इंसानियत ही सब से बड़ा धर्म है। जिनको सरकार खोज रही थी कोरोना कि बीमारी फैलाने के लिए या ऐसे लोग जिनको कारोना हो गया था और जिन्हें समाज नफरत से देख रहा था। आज उनको ही बोला जा रहा है अपना खून देने के लिए। प्लाज्मा थेरेपी के द्वारा इलाज करने के लिए फिर खुदा ने बता दिया खून सब का एक है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो। कुदरत ने तमाचा मारा है भेद भाव फैलाने वालों को।


 


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