चिट्ठी के जरिए बाबा रामदेव से अश्रुपूरित प्रार्थना


सन्दर्भ : बाबा आपके पांव पड़ूं - दाम आटा का क्यों बढ़ा दिए बाबा ?


श्रीमन् !


इन दिनों भारत ही नहीं पूरी दुनियां में सनातन संस्कृति की शिविका (पालकी) आपकी पतंजलि संस्थान के कंधे पर है। सनातन संस्कृति में पेट की अग्नि में आहुति डालना ही यज्ञ, हवन कहा गया है। इसका ज्ञान प्राचीन काल में ऋषियों, मुनियों ने दी है। वही छवि प्रचार माध्यमों ने आपकी बनाई है।


पढ़ा जाता है कि सनातन संस्कृति में चींटी को आटा-चीनी खिलाने से उग्रदेवता शनिदेव की प्रतिकूलता कम होती है । मंचों से तमाम प्रवचनकर्ता बोलते हैं कि महाभारत का मुख्य खलनायक दुर्योधन ने एक कुत्ते को अपना हिस्सा खिला दिया था, जिसके चलते उसे वरदान प्राप्त हुआ था कि जिस भंडारे में वह रहेगा, उसमें अन्नपूर्णा विराजती रहेगी । अन्न का संकट नहीं होगा।


बाबा ! क्या है सिर्फ बोलने, सुनने और मनोरंजन के लिए है ? यदि ऐसा नहीं तो फिर आप अपनी दुकानों से आटा सस्ते दर पर बटवाइए।


बाबा ! इधर पता चला है कि कोरोनाकाल में आपका आटा भी मूल्य के मामले में कोरोना से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। ग्राहक बताते हैं कि अप्रैल में यह दो बार छलांग लगा चुका है। पीएम केयर फंड में सहयोग देने के बाद 375/- में 10 किलो का पैकेट 390/- का हो गया है।


बाबा ! इस छलांग को तत्काल रोकिए। गेहूं का सीजन है । बाजार में 22/ से 24/- में 10 किलो बिक रहा है। आपने पीएम फंड में रुपया दिया है तो उसको जोड़कर अधिकतम 26 से 28 रुपए प्रति किलो तक अपना आटा करिए ना बाबा !


बाबा ! यदि आप ऐसा करते हैं तो इतिहास के पन्नों में आप गांधीजी को मिली बापू एवं  राष्ट्रपिता उपाधि से भी उपर की उपाधि बाबा और राष्ट्रबाबा से सुशोभित होंगे। यदि इतिहासकारों ने कोरोनाकाल में आटा के मूल्य में वृद्धि लिखना शुरू किया तो भावी पीढ़ी को बहुत ही आघात लगेगा।


- हम हैं


कोरोना के चलते भूख से बिलबिलाते लोग


(जनसामान्य के कहने पर बाबा को यह पत्र सार्वजनिक रूप से भेजा जा रहा है।


✒ सलिल पांडेय, मिर्जापुर


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